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Allama Afaque Ahmad Mujaddidiबह्र उल-इरफ़ान: समात व जहातचिराग नक़्शबंदी की ज़िया

अध्याय 65 में से 65पृष्ठ 443–445

चिराग नक़्शबंदी की ज़िया

शजर मकिन पूरी

चिराग नक़्शबंदी की ज़िया आफ़ाक़ अहमद हैं

लगाये सीने से हर सिलसिला आफ़ाक़ अहमद हैं

न घबरा ए मुरीद बा वफ़ा आफ़ाक़ अहमद हैं

त्री किश्ती के अब भी नाखुदा आफ़ाक़ अहमद हैं

रसूल पाक को हरगिज़ न अब अपनी तरह कहना

मुनाफ़िक़ ने मुनाफ़िक़ से कहा आफ़ाक़ अहमद हैं

सईद उन के बदल बरकात उन के जानशीन ठहरे

उन्हें अब देख कर लगने लगा आफ़ाक़ अहमद हैं

ख़ुदाए पाक ने है बख्श दी आफ़ाक़ीयत ऐसी

लगा आफ़ाक़ में हर इक जगह आफ़ाक़ अहमद हैं

झुका कर आंख अपनी देख लो मुर्शद को जब चाहू

तुम्हारे दिल में ही जलवा नुमा आफ़ाक़ अहमद हैं

मदार पाक के दर पर कभी वारिस की चौखट पर

शजरؔ इख़लास की ओढ़े रदा आफ़ाक़ अहमद हैं

नूरानी दरबार है

मौलाना सय्यद शाज़ारफी

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नूरानी दरबार है मेरे मुर्शिदिका

इर्फानी घरबार है मेरे मुर्शद का

जो भी देखे महव हैरत होजाए

आफ़ाक़ी संसार है मेरे मुर्शद का

किस की हिम्मत उनके मुक़ाबिल आजाय

इश्क नबी हथियार है मेरे मुर्शद का

चेहरा है या नूर का बहता दरिया है

नूर नहीं अनिवार है मेरे मुर्शद का

भूके प्यासे दीन की ख़िदमत देखी है

ऐसा अमल सद बार है मेरे मुर्शिदिका

उन की इंगुली क़ल्ब को जाकिर करती है

रब्बानी इकरार है मेरे मुर्शद का

कब्र से छिन्न कर नूर निकलता रहता है

किया आली दरबार है मेरे मुर्शद का

मेरा मुर्शद लासानी है लासानी

लासानी दरबार है मेरे मुर्शद का

नाज़ से बोलो आफ़ाक़ी हूँ आफ़ाक़ी

सरहंदी दरबारहे मेरे मुर्शद का

उर्फ़ीؔ तुझ को क्यों न बुलंदी हासिल हो

तुझ से दिल सरशार है मेरे मुर्शद का

हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान की मतबूआ व गैर मतबूआ किताबों की फिहरिस्त

मतबूआ कुतुब: (1) आदाब तरीक़त (2) सिलसिला नक़्शबंदिया और इस का सुलूक (3) हज़रत मुजद्दिद अल्फ़ सानी अपने कमालात और दीनी ख़िदमात के आईने में (4) तज़किरा मशाइख़ मुजद्दिदय (5) ज़िक्र व फ़िक्र (6) तज़किरा मशाइख़ सुह्रवर्दीय (7)नग़मात बह्र उल-इरफ़ान ( मजमूआ नात व मनक़बत) (8)अस्सलाह वल-फ़लाह (9)उलमाएआख़िरत (10)तरबीयत अहले सुलूक (11)सूफ़िया और उन के मआरिफ़ (12) तसव्वुफ़ और इस के फ़वाइद (13) तजदीद अल्फ़ सानी (14) ख़साइस नक़्शबंदिया (15) तहदीस नेमत (यह हज़रत की ख़ुद नविश्त सवानिह है जिसे बह्र उल-इरफ़ान: समात व जहात के आगाज़ में शामिल कर दिया गया है)

गैर मतबूआ कुतुब:

(1) शरह मिला हसन (2) शरह उसूल उलशाशी (3) शरह मेज़ान अलसिर्फ़ (4) कश्फ़ व इलहाम की शरई हैसियत (5) शतहयात और उन के असबाब (6) मआरिफ़ मुजद्दिद (7) इस्तिलाहात तसव्वुफ़ (8) सुगरवी सादाद और उन की ख़िदमात (9) गोसीयत व मदारियत (10)खुलासा मक्तोबात शाह गुलाम अली देहलवी (11)हदीस तजदीद (12)दागहाए दिल (13) सलासल और उन के असबाब इख़तिलाफ़ (14) शरह इस्तिलाहात तसव्वुफ़ (15)नुबुव्वत व विलायत (16) तर्जुमा मुबदा व मुआद (17) तर्जुमा मुक़ामात अहमदिया सईदेह (18) मशाइख़ नक़्शबंदिया और तोहफ़्ज़ संयत (19)तर्जुमा हमुआत(20)रवाइह सकीना तर्जुमा लताइफ़ मदीना (21) रिसाला फ़वाइद कश्फ़ (22) मुहतमिम व मुअल्लिम के आदाब (23) इर्शादात मशाइख़ (24)हज़रत मुजद्दिद की बाज़ करामतें (25) नजदीत अपने अफ़्क़ार व आमाल के आईने में(26)अज़मत सहाबा (27) दावत अली अल्लाह (28)मूसिल उलमुरीद अली अलमुराद (अरबी) (29)तर्जुमा रिसाला इस्बात अलंबोत (30)तर्जुमा रिसाला रद्द शीयेत वगैरह।

नोट: वफ़ात से कुछ दिनों पहले हज़रत ने एक रिसाला मबनी बुर अक़ाइद अहले सुन्नत व जमात और एक किताब हज़रत सय्यद बहा उद्दीन नक़्शबंद बुखारी रहमत अल्लाह अलैहि के मुक़ामात पर भी कलम बंद फ़रमाया।