अध्याय 39 में से 65पृष्ठ 267–274
बह्रुल-इरफ़ान,तर्जख़िताबत
मौलाना मुहम्मदशमस तबरेज़्क़ादरी अलीमीؔ*
अल्लाह तबारक व तआला रब अलालमीन,अहकम अलहाकमेन, फ़आल लिमायरीद, और साहिब कण फ़िकां है, वह ख़ालिक़ हफ़्त आसमां ओरमालिक एं व आं है मगरान सारी हक़ीक़तों के बावजूदास काहरकाम असबाब वोसाइल ही के हवाले से अंजाम पज़ीरहोताहै।यही वजह है कि इस कायनात कोआलम असबाब के नाम से जानाजाताहै।इंसानों काया जिम ग़फेरिजोदन वरात कायनात की तसख़ीरमें सरगर्दां अवरणित नयी ईजादात में मसरूफ़ है ,इस के जिसम वरूह की तस्कीन के लिए इस ने बे शुमार्चीज़ें पैदाकी हैं। जिस तरह जिसम की तस्कीन के लिए जमीन कामखमली फर्श बिछाया।आसमान काशामियाना लगाया।खेतों से अनाज औरसब्ज़ा उगाया,दरख्तों से अन्वा वाक़साम के फल फ्रूट पैदाकिये,इसी तरह इस ने रूह की आराइश वज़ीबाइश ओरराहत व आराम की खातिरअपने ज़िक्रोफ़िकर,तस्बीह वितहलील औरावराद व वज़ाइफ़ कानुस्खा अताफ़रमाया। और उन नुस्खों के इस्तेमाल कातरीका बताने के लिए हर दौर और हर जमाने में अनबीए कराम कोमबऊस फ़रमाया। हज़रत आदिम अलैहि अस्सलाम से ले कृष्हंशाह ज़ी वक़ार, सय्यद अबरार व अख़्यार हुज़ूर अहमदमज्तबा मुहम्मदमस्तफ़ा ﷺ तक कम वबेश एक लाख चौबीस हज़ारानबीए कराम वरसोलान अजाम की एक नूरानी जमात इसी मक़सद खेरके लिए मबऊस की गई।
नबी आखिरुज़्ज़मां ﷺके ज़ाहिरी विसाल के बादइल्लाह रब अलाज़त ने कुछ ऐसे नफ़ूस क़ुदसिया पैदाफ़रमाए जिन्हों ने मुर्दा क़ौमों कोजलाबख्शी औरबरसहाबरस के ख़ाबीदा लोगों कोख़्वाब गफलत से बेदारकरके उन्हें मंज़िल मकसूदकासहीह पता दिया,जिन्हों ने दीन इस्लाम की नुसरत वहिमायत कुआपनाजिज़ोजिन्दगी बनायौरहमेशा दीन मतीन अवरामत मुस्लिमा की ऋषिदोहिदायत में कमरबस्ता रहे, यह वह मुक़द्दस हस्तियां थीं जिन्हें अल्लाह तआला ने अपने फजल विक्रम से गुमराहों की हिदायत,सुरक्षों की इसलाह औरहक़ वबातिल के दरमियान इमतियाज़िपीदाकरने के लिए मबऊस फ़रमायाथा।जिन्हों ने अहया दीन वसनीयत के लिए अपनी ज़िन्दगी कोसिर्फ़ करदियाथाहक़ गोई विरासत बाजी जिन काशआर्था,दुनियाकी कोई ताकत उन्हें अपने फ़राइज़ मंसबी की अदाएगी से रोक न सकी ।
उन्हें बर्गुज़ीदा नफ़ूस क़ुदसिया में से बह्रुल-इरफ़ान हज़रत अल्लामा मुफ्ती आफ़ाक़ अहमदमजददी नक़्शबंदी अलैहि अर्रहमा की ज़ात ग्रामी है जिन के क़दूम मेमंत लज़ूम की बरकतों से क़न्नौज विगुर्दोनवाह की सरजमीं तालीम वितरबैत ,ऋषिदोहिदायत के अनिवारसे जगमगाने लगी,आप ने तालीम वितरबैत,तामीरवतंज़ीम ,इसलाह वार्शादावरएमाल विकिरदारके ऐसे अनोखे कारनामे अंजाम दिए हैं जिन से आने वाली नस्लें फ़ैज़ याब होती रहीं गी औरजिसे उन शा अल्लाह उलअज़ीज़कयामत तक यादकियाजाये गा,क़न्नौज में आप के क़याम की बरकत से जहालत की तारीकियां छुट गईं ओरगम गश्ता राहों कोहिदायत विरहनुमाई औरइलम दीन की दौलत सरमदी नसीब होगई।
विलादित बासआदत:
आप की विलादित ज़िला फ़र्ख़ आबादके एक गावम भड़ोंसा,पोस्ट, जरारी के एक तक़्वा शआर, देनदारघराने में 1959 कोहुई।आप के वालदकानाम हाजी क़याम उद्दीन मरहूम है जो10/मुहर्रम उलहराम 1429 ह कवास दारफानी से दारब्क़ाकी जानिब रहलत फ़रमागए,बड़े मुत्तक़ी, परहेज़गार, शब् ज़िंदा दार्थे आप के वालदबुज़र्गवारके मुताल्लिक़ यह बयान कियाजाताहै कि ‘‘उमरके आखिरी अय्याम में तहजदुकी पाबंदी इस क़दरथी कि अपने मातहत लोगों कोरात में जगाकरमसजिदले जाते और नमाज़ तहजद मस्जिद में अदा फ़रमाते, कबरसनी में जब कि आम लोगों काहाल यह होताहै कि अपने बस्तरपुरख्वाब खरगोश के मजे लेते रहते हैं ऐसी कमज़ोरी वनातवानी के आलम में भी आप एक रात में स्वसुरकातें नवाफ़िल पढ़ाकरते औरअपने इल्म के मुताबिक मोतक़िदीन कोनवाफ़िल वगैरह की तरग़ीब भी दियाकर्ते थे‘‘। आप की वालिदा माजिदा कानाम बी बी हसब अलनिसा है, आप दुनियोमाफ़िय्हासे बे नयाज़होकरख़ुशनुदी रब के लिए सिर्फ़ इबादत वरियाज़त में लगी रहती हैं, नमाज़ पंजगाना वनवाफ़िल,मुस्तहबात कोबड़ी पाबंदी के साथ अदाकरने वाली नेक ख़ातून हैं, अक्सराऔकात औरादवोज़ाइफ़, अदीय वाज़कारख़सूसईदलायल अलख़ैरात शरीफ़ पढ़ने में सिर्फ़ करती हैं, शहजादा आला हज़रत हुज़ूरमुफ्ती आज़म हिंद्रहम अल्लाह अलैहि से बीअत वारादत रखती हैं।
हुसूल उलूम दयनीय:
आप ने इबतिदाई तालीम अपने गावम ही में रह करहासिल कीं,वालिदा मुहतरमा की देरीना ख्वाहिश थी कि मेरा लख़्त जगरनौरणज़रद्दीन काबहुत बड़ाआलम बने, इस के लिए वह हमेशा अपनी दुआओं में रब से इल्तिजाभी
कयाकृति थीं मगरकरीबी इलाक़े में बेहतरीन दारउलउलूम न होने की वजह से आप की दिल्ली ख़ाहिशात की शमा टिमटिमाने लगी थी कि एक बारजब डंडवानामी जगह परहुज़ूरमुफ्ती आज़म हिंदाल्या अर्रहमा की तशरीफ़ आवरी हुई तोआप भी अपने पीरुमर्शदकी ज़ियारत के लिए वहाँ गईं औरकिसी के तवस्सुल से मुर्शिदत्तक अपनापैग़ाम इरसाल किया,हुज़ूरमुफ्ती आज़म हिंदुके फरमान के बमूजब हज़रत बह्रुल-इरफ़ान कौशहरबदायूं में घंटा घरके क़रीब वाक़्य मस्जिदजाफरी में क़ायम शुदा मदर्रिसा में दर्स निज़ामी की तालीम हासिल करने के लिए दाखिल करदियागयाआप ने मुफ्ती खलील साहिब के पास ज़ानुए तिलमिज़्ते किया और वहीं हुसूल इल्म दीन में लगे रहे,चंदबरसों के बेदबारगाह तारक अलसल्तनत, हुज़ूरमख़्दूम अशरफ जहांगीरसमनानी अलैहि अर्रहमा के दरबारसे आप का बुलावा आज्ञाऔर आप ने शहरबदायूं से कछौछह मुक़द्दसा के लिए रख़्त सफर बांधा, यहाँ पहुँच कराप ने वक़्त की अज़ीम दानिश गाह जामा अशरफ में दाखिल लिया और शब् विरोज़मेहनत विल्ग्न से हुसूल इल्म में सरगर्दां रहे, यहीं से फ़राग़त हासिल की ,बादफ़राग़त जामिआ हज़ा में बहैसीयत मदर्स मुक़ररहोगए।कछौछह मुक़द्दसा में क़याम के दौरान आप यहाँ के सोफिया विमशाइख़ ख़ुसूसनविशेख़ आज़म हज़रत अल्लामा मौलाना सेदशाह मुहम्मदाज़हाराशरफ अशरफी जैलानी अलैहि अर्रहमा के महबूब नज़रबन कररहे।
अज़दवाजी ज़िन्दगी:
ज़िला क़न्नौज, मक़ाम, अकबरपुर, के एक शरीफ़ विमाज़िज़, इल्मी घराने में आली जनाब मुहम्मद शब्बीर मरहूम साहिब की दुख़तरनेक अख़्तरबी बी ज़फ़रालनिसा से बरोज़मंगल 23/मई 1978 में आप काक़दमस्नून हुआ। जिन से दौसाहबज़ादे; हज़रत मौलानाआहमदसईदमजद्दी,मौलानाबरकात अहमदमजददी ओर्छ साहबज़ादियां तौलदहुईं, ख़ुदाए तआला के फजल विक्रम से दोनों साहबज़ादे औरसाहबज़ादियां आ लमीत वफ़ज़ीलत के बाददर्स वितदरीस के फ़राइज़ अंजाम दे रहे हैं।
अल्लाह तबारक व तआला आप के फ़र्रज़िंदान कोसल्फ़ सालहीन औरख़ानवादा मुजद्दिदय नक़्शबंदिया कास्चानमूना बनाए औरवालदबुज़र्गवारकासहीह माअनों में जानशीन औरक़ायम मक़ाम बनाए।आमीन।
बीअत वखिलाफ़त:
हुज़ूरबहरालारफान अलैहि अर्रहमा कोहज़ूरआरिफ़ बिल्लाह फ़नाफ़ी अल्लाह शैख़ अहमदरज़ाखान साहिब बनारसी दाम ज़ला अलाली वालनोरानी से सिलसिला नक़्शबंदिया मुजद्दिदय में बीअत वारादत हासिल थीं ओरबाकायदा तौरपर्सलोक की
मंजिलें तै कराई गईं,ओर्सलासल अर्बा में इजाजत वखिलाफ़त से नवाज़े गए थे।
तर्जतकरीरोख़िताबत:
हुज़ूरबहरालारफान अलैहि अर्रहमा को अल्लाह तबारक व तआला ने उलूम ज़ाहिरी से वाफ़रहिस्सा अता फ़रमाया था। साथ ही साथ आप कौमादा तफ़हीम की ऐसी अज़ीम नेमत से भी सरफ़राज़फ़रमायाकि आप दकीक़ से दकीक़ औरपेचीदा मिसाइल कोबड़ी सादगी औरखुश उसलूबी के साथ सामईन अवाम एलिनास के ज़हनों में महफूज़ करदियाकर्ते थे। हज़रत कातरज़ख़ताबत, अंदाज़बयान, सादगी अवर्षाइस्तगी से पर हुआ कर्ताथा, उस्लूब निहायत उम्दा होताथा, दरमियान ख़िताबत कभी कभी जलाल वजमाल का रंग भी नज़रआताथाजिस से मजमा बेदार और मुस्तादहोकरग़ौरोफ़िक्रके साथ कान लगाकरसंने लगताथा। अपने खिताब काआग़ाज़ारबी ख़ुतबा से फ़रमाते थे फर्मौज़ू की मुनासबत से आयत मुक़द्दसा तिलावत करते, बादा नबी रहमत शफ़ी उम्मत ﷺ की बारगाह गहरबारमें निहायत अकीदत वाहतराम के साथ द्रोदशरीफ़ कातोहफा पेश फ़रमाते थे, बुजुर्गों के तहरीरकरदा चंद अशआर पढ़ते, फराहादीस करीमा और आयात क़ुरानीय, अइम्मा कराम के अक़्वाल की रोशनी में आयत मतलव परहालात हाजिरा के तनाज़ुर में ईमान अफरोज़ख़िताब फ़रमाते थे।
ख़िताबत के दरमियान आप आयात क़ुरानीय औराहादीस मुबारका बड़े अछूते अंदाज़में पढ़ते थे कि सामईन प्रएक अजब सावजदतारी होजायाकर्ताथा,मुतालिब विमफ़ाहीम सलेस ओरणहायत आसान, उम्दा पैराये में बयान करते थे। सामईन के अज़हान वाफ़्काराप की ख़िताबत से बोझिल नहीं हवाकरते थे बल्कि दिल विद्माग में ख़ौफ़ वख़शीयत इलाही मोजज़िन हो जाया करता था हर एक कादिल यह कहने परमजबूरहोजाताकि आज औराभी से सच्ची तौबा करते हैं औरइन शा अल्लाह बक़ीया ज़िन्दगी यादइलाही में गुज़ारदें गे। जब किसी कान्फ्रेंस में हज़रत की तकरीरहोती तोलोग बग़ौरसुनते, ज़र्रा बराबरभी उकताहट काशिकारनहीं होते थे बल्कि मजमा से बसाऔकात यह आवाज़गूंजती थी कि थोडी दिरावरख़िताब फरमाएं ।
हज़रत के सैकड़ों ख़ुतबात टेप हैं।बाज़ ख़ुतबात यूट्यूबYoutubeप्रभी अपलोड हैं। हुज़ूरबहरालारफान अलैहि अर्रहमा की मजलिस में रक्त आमेज़,दिल नशीं अवर्ख़शीयत इलाही से लबरेज़्गुफ़्तगूहवाकृति थी ।शब् वरोज़्वाज़ वंसाइह की महफ़िलें सजी रहती थीं,ख़ल्क़ ख़ुदाकसीरतादादमें शामिल होती अवर्षादकाम होती थी,आप के खिताब कोसंने के लिए अवाम एलिनास कियाख़वास हज़रात भी जिम ग़फेरिकी शक्ल में कोशां
रिहाकरते थे,नसीहत आमेज़कलिमात सन क्रास परअमल कयाकरते थे।
ख़तीब विमबलग़ हक़ीक़ी माअनों में एक आलम बाअमल ही हवाकर्ताहै कि जिस के अंदर ख़ुदा का ख़ौफ़ और इस की ख़शीयत हो,और्तक़रीरोख़िताबत से मकसूद रिया व नाम वनमूद न हो बल्कि अवाम अहले सुन्नत की इसलाह, बदामालियों से नफरत, उन के अंदर अल्लाह जल जलाला और इस के रसूल ﷺ की मुहब्बत वाल्फत पैदाकी जाए, हम जब बह्रुल-इरफ़ान अलैहि अर्रहमा की ज़िन्दगी कामुताला करते हैं तोआप की ज़िन्दगी ख़ौफ़ वख़शीयत इलाही से लबरेज़ पाते हैं। आप अपनी तकरीरमें असरहाजिरके बे अमल, पेशा वर्मक़र्रों की तरह हूरवक़्सूरके किस्से, कहानी बयान करने के बजाए दावत फ़िक्रवामल देते हैं चुनांचे आप एक खिताब में फ़रमाते हैं:’’ कि आज हरिघरमें परेशानी है, कमाई में बरकत नहीं है, जिसे देखो वही परेशान नज़रआरहाहै यह सब बुलाएं क्यों आरही हैं? इमाम अहलसन्नत आला हज़रत अलैहि अर्रहमा एक हदीस नकल करते हैं बेहक़ी के हवाले से कि इंसान नमाजपढ़ताहै दुआएं माँगताहै इस के उपरकोई ब्लाआने वाली होती है तोवो दुआजवास के मुँह से निकलती है रास्ते में जाकरबलासे चिमट जाती है औरब्लाकुघेरलेती है,यह खाली दुआएं जब बिलावं कोटाल सकती हैं तो नमाज़ें कितनी बिलावं कोटालती हैं। मेरे नबी ﷺ ने फ़रमायाकि लोगो! घरों कोकब्रिस्तान न बनाव! आक़ाआलीय अस्सलाम रगबत दिलाते हैं कि घरों में एक जगह ख़ास कर्दोनमाज़ों के लिए,तुम्हारी अव्रतें वहाँ एतिकाफ़ भी करसकती हैं, यह मस्जिदबीत है। सुबहान अल्लाह! सर्वरिकायनात ﷺ फ़रमाते हैं जोशख़स ‘‘सुबहान अल्लाह वबहमदा सुबहान अल्लाह उलअज़ीम’’ सोबारपढ़े तविल्लाह तआला इस के गुनाह माफ़ करदे गा अगरचे समुंद्रके झाग के बराबरहों।
हज़रत बह्रुल-इरफ़ान अलैहि अर्रहमा की ख़िताबत काज्यादा तरहस्सा ऐसी बातों परमुश्तमिल होताथाजन कोसन करहाज़रीन के दलों में खौफ इलाही औरअश्क रिसालत की लहरें उठती हुई नज़रआती थीं,क्योंकि आप अपने तर्जख़िताबत से वाह वाही लौटनाऔरणामवरी पैदाकरनान्हें चाहते थे बल्कि ख़िताबत कूदावत वितबलीग़ दीन मतीन के लिए एक अहम ज़रिया बनाए हुए थे ।ख़िताबत कामक़सदसिर्फ़ यही थाकि दुनियाके गाफिल इंसानोंको हर्बुराई से नफरत दिलाई जाए औरगुनाहों से दौरकियाजाये ताकि वह ख़ुदकोअपने रब के हुज़ूरमहसूस करें ,एक बुजुर्ग ने वली की पहचान यह बताई है कि उसे देख करख़ुदा याद आताहै, सच्चे इस्लामी ख़तीब की पहचान भी यही होनी चाहिए कि इस की बातें सन कर्ख़दायादाजाए ,ख़ुलूस वललहेत औरफ़िक्री तहारत
बाअसरासलामी ख़िताबत कालाज़मी जिज़हे उन के बग़ैरबातों में असरपैदान्हें होता,ख़िताबत कादिली मकसदभी दावत अली उलहक़, फ़रीज़ा इस्लामी की अदाएगी औररज़ाए इलाही, ख़ुशनुदी मुस्तफ़वी की तलब होनी चाहिए ,यह जुमला ख़ुसुसीआत आप के तर्जतकरीरोख़िताबत में बदरजा उत्तम मौजूदहैं ।आप शैख़ शहाब उद्दीन सुह्रवर्दी रहमत अल्लाह अलैहि के इस कौल कोअपने तर्जख्ताब में अमली जामा पहनाते हुए नज़रआते हैं:’’ ज़ाबता यह है कि जब मबलग़ गुफ़्तगूकररहाहूत्वास की ज़बान लोगों से खिताब कररही होऔरइस कादिल बारगाह रबूबियत में कशकोल बिन के पड़ाहुऔरउल्लाह की बारगाह में यह आरज़ूकररहाहूका मालिक लफ़्ज़ त्वमें अदाकररहाहूँ तासीरकी शेरेनी तवान के दलों में उतारदे‘‘। यह नयी रेत ख़िताबत के मैदान में आप ने ही पेश की थी।
क़ारईन कराम!बह्रुल-इरफ़ान अलैहि अर्रहमा के ख़ुतबात कूजब आप गहराई वगेराई से सुनें गे तोआप कोमालूम होगाकि आप अपने तर्जख्ताब से लोगों कोतज़किया नफ़्स, रुजू अली अल्लाह,इस्तिक़ामत फ़ी उद्दीन,ज़िक्रोफ़िकर,पाबंदई सौम वस्ला कादर्स देते नज़रआते हैं।राक़िम उलस्तूर्की मुलाक़ात हुज़ूरबहरालारफान से सरजमीं चिंचूरा, ज़िला,छपरा, बिहारके एक जलसा में हुई थी ,अक्सराऔकात आप के ज़िक्रमें गुजरते थे, सफ़रोहज़रमें भी शरीअत मुतहरा की मुकम्मल पासदारी फ़रमाते थे, आप ज़्यादा त्रिज़िक्रकलबी कयाकरते ,जिक्रलसानी ख़ुद भी करते औरअपने मुरीदैन विमतोसलीन कोभी इस की ताकीद कयाकरते थे, उम्मत मुस्लिमा के नौजवानों की इसलाह के लिए जहदमसलसल करते, दीनी उदारे काक़याम,तब्लीग़ी असफार,खानक़ाहों की तामीरफ़रमाते, जब कौम के अहवाल परिंजरडालते तोआप इज़हाराफ़सोस करते हुए कहते थे कि मेरी कौम के जवानों! तुम्हें शोशल मीडियाकाया केसामर्ज लाहक़ होगयाहै कि रात में जिल्द सोते नहीं बल्कि इंटरनेट ,वीडियोज़,गेमज़मीं अपने कीमती औकात सिर्फ़ करते हवावरणमाज़ें क़ज़ा करदेते हो,अल्लाह तआला ने रात बनाई है सोने के लिए मगरतम ने उसे दिन बनादिया,ऊर्जोदन अल्लाह ने काम काज,इबादत वरियाज़त के लिए बनायाथातम ने उसे रात बनादिया,एक तकरीर में फ़रमाते हैं:कि सर्वरिकायनात ﷺकाएक ही निजाम थामेरे आक़ाशा से पहले सोनापसंदनहीं करते औरअशा के बादबातें नहीं पसंदफ़रमाते थे। इस लिए कहनाया है कि इशा से पहले सारी ज़रूरी बातें करनी होकरलो,इशा पढ़ करसोजाव, सुबहान अल्लाह! मेरे नबी कोतुमहाराकितनाबड़ाख़्याल है, तूने वुज़ूकियागनाहों से पाक होगए ,जोबचे वह नमाज़ों से धुल गए ,नमाज़िके बादकोई गुनाह काकाम किए बग़ैरसोजाव तोगव्यात्म
गुनाहों से पाक विसाफ़ होकरसोए,अग्रिमवत इस हालत में आगई तोसुबहान अल्लाह !ख़िरामाँ ख़िरामाँ जन्नत में चले जाओगे।
असरहाजिरके अक्सरख़ुतबा के ज़ाहिरोबातिन ,क़ाल वहाल में तज़ादनज़रआताहै, स्टेज से जो पैग़ाम अवाम कोदेते हैं ख़ुदास परअमल पैरान्हें होते हैं, दुनियाकमाना, ज़ोरबियां दिखाना, वाह वाही लौटना, तर्ज़ ख़िताबत में इस क़दरमसखरा पन इख्तियारकरनाका अहले फ़िक्रूदानिश देख करबूल पड़ें कि यह कोई मबलग़ नहीं बल्कि जोकिरहे। इस के ब्रअक्स बह्रुल-इरफ़ान के तर्जख़िताबत औरंदाज़तबलीग़ कोसमाअत करने वाला सामे यह कहने परमजबूरहोजाताहै कि आप की ज़बान से जोबात निकलती है फ़ौरन गाफिल इंसान के दिल प्रासरंदाज़होजाति है,क्योंकि आप काजाहिरोबातिन हमेशा एकसां नज़रआताहै पहले ख़ुदशरीअत परअमल करते हैं फरावाम क्वामल की दावत देते हैं, उल्मा विमशाइख़ के मुताल्लिक़ आप फ़रमाते हैं: आज अक्सराल्मा सरे से नमाजरूज़े के पाबंदहीं ही नहीं,जूहें भी तवान की अक्सरीयत जमात, ख़ास कर्मसजिदमें मुक़तदियों के साथ नमाज़ादाकरने काकोई ख़याल ही नहीं रखते हैं जिस की वजह से अवाम के दलों से ऐसे उल्मा की क़द्रोक़ीमत औरअकीदत विमहबत निकल गई है।जवान उल्मा की नज़रमें तोनमाज़की कोई हैसियत नहीं रही, अक्सर पीर और पीरज़ादे और असातिज़ा नमाजसे कोसों दौरहीं, पेशा वर्मक़र्रों कातोंहायत ब्राहाल है, अक्सर्जवान हुफ़्फ़ाज़ वक़रा औरउल्मा जोमसाजिदके इमाम हैं वह मजबूरी में नमाजपढ़ते हैं, इमामत से बरतरफ़ होते ही नमाज़ुकी कोई फिकरन्हीं रहती है।
मज़ेदफ़रमाते हैं कि आज के उल्मा विमशाइख़ के इस किरदारसे इस्लाम वसनीयत कोजोनुकसान पहुँचावे हरहसास औरज़ी इल्म जानताहै,मुख़ालिफ़ फ़िरक़े अवाम क्वान काकरदारदखादिखाकरोहाबी, देवबंदी वगैरह बनाए जारहे हैं, नमाज़िके ताल्लुक से इस लापरवाही कोदेख करेआम इंसान नमाज़ुकी अहमियत वाज़मत कोखोबैठाहे,जब उन उल्मा विमशाइख़ काया हाल है तवान के मुरीदैन विमतोसलीन औरइन के अहबाब विमुताल्लिक़ीन की लापरवाही काआप बखूबी अंदाजा करसकते हैं‘‘।उन मज़कूरा बालाआकवाल से एक हस्सास वज़ी फ़हम आदमी बखूबी अंदाजा लगासकताहै कि हुज़ूरबहरालारफान शरीअत मुतहरा की किस क़दरपासदारी कयाकरते थे कि अपनी ख़िताबत से अवाम वख़वास सभों के दलों में ख़ौफ़ इलाही की शमा रोशन करदियाकर्ते थे।मुख़तलिफ़ जलसों,कान्फ्रेंसों,ओरसेमीनारों में आप के ख़ुतबात जान पैदाकरते थे,आप के तर्जख़िताबत की
ख़ास बात यह थी कि इतनाही बोलते जिस की ज़रूरत होती थी औरजिस परासानी से अमल कियाजासके।
विसाल प्रमलाल:
बरोज़हफ़्ता,9/ज़ुलवादा ,1440 ह मुताबिक:13/जुलाई,2019 कोआप दाई उज्जल कोलबैक कहते हुए ख़ालिक़ हक़ीक़ी से जामुले । अनिलिलाह वानाआलय राजावन
अबररहमत उनके मर्क़दपुरगहरबारी करे
हश्रतक शान क्रीमी नाज़िबरदारी करे
अल्लाह रब अलाज़त बह्रुल-इरफ़ान अलैहि अर्रहमा के दर्जात बुलंदकरे ,पसमानदगान कौसब्रजमील वाजर्जज़ील से नवाज़े,उन के नुक़ूश क़दम प्रगामज़न रखे ।आमीन।
*दारालाफ़ता,दारउलउलूम क्लिमय रिज़वीह हिफ़्ज़ उलक़ुरआन, मालदह