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Allama Afaque Ahmad Mujaddidiबह्र उल-इरफ़ान: समात व जहातअख़लाक़ व किरदार के पीकर बह्र उल-इरफ़ान

अध्याय 31 में से 65पृष्ठ 222–228

अख़लाक़ व किरदार के पीकर बह्र उल-इरफ़ान

अख़लाक़ व किरदार के पीकर,बहरालार फ़ान हुज़ूर मुफ्ती आफ़ाक़ अहमद मुजद्दिदी अलैहि अलर हिमा

हाफ़िज़ मुहम्मद हा शम कादरी मिस्बाही जमशेद पुर*

अल्लाह रब अलाज़त ने इंसानों को पैदा फर माया और इरशाद फर माया:

لَقَدْ خَلَقْنَا الْاِنْسَانَ فِیْٓ اَحْسَنِ تَقْوِیْم۔(القرآن،سورہ والتین،95:آیت،4)

तर्जुमा: बेशक हम ने आद मि को अच्छी सूरत में बनाया। (कंज़ अलायमान)

अल्लाह तआला ने अंजीर,जैतून, तौर सेना, और शहर मक्का की किस्म ज़िक्र कर के इरशाद फर माया:कि बेशक हम ने आदमी को सब से अच्छी शक्ल वसूरत में पैदा किया, इस के आज़ा में मुनासबत रखी उसे जानवरों की तरह मुँह से पकड़ कर नहीं बल्कि हाथ से पकड़ कर खाने वाला बनाया और उसे इल्म, फ़हम और बातें करने की सलाहीयत से नवाजा,इंसान अल्लाह का जितना शकर अदा करे कम है कि अल्लाह ने इंसा नों को अक्ल व तमीज़ जैसी अज़ीम नेअमतों से सरफ़राज़ फर माया।

दुनिया का हर इंसान यह चाहता है कि वह दुनिया में कामयाब हो, कामयाबी वकामरानी का सेहरा उसे ही नसीब हो पर यह नेमत सब के नसीब में नहीं जिसे अल्लाह अता फर माए। दुनिया की मुस्तनद तारीख इंसाईकिलो पीडियाब्रिटानेका का मुसन्निफ़ लिखता है बिलाशुबा’’ मुहम्मद बिन अबदुल्लाह: मुहम्मद( ﷺ) यह ख़ुदा के आखिरी पैगम्बर दोनों जहानों के नबी और सारी इंसानियत के मुअल्लिम हैं और आप ही अल्लाह के तमाम बंदों में अच्छे हैं, इसी तरह उन्नीसवीं सदी का एक बहुत बड़ा मसीही मुअर्रिख़ माइकल हार्ट ने अपनी मशहूर किताब (The hundred) ‘‘में आप को कामयाब इंसान के तौर पर पहले नंबर पर जगह दी है।

बुला शुबह अल्लाह तआला ने रहमत आलम ﷺ को बे नज़ीर बनाया और आप के सद कै वितफ़ेल सहाबआ कराम, ताबईन,तबा ता बईन,औलियाए कराम रिज़्वा न अल्लाह तआला अलैहम अजमईन को भी इज्जत बख्शी।इरशाद बारी तआला है:

وَلِلّٰہِ ا لْعِزَّۃُ وَلِرَ سُوْلِہِ وَلِلْمُوْٗ مِنِیْنَ وَلٰکِنَّ الْمُنٰفِقِیْنَ لَا یَعْلَمُوْنََ۔

तर जमा:इज्जत तो सिर्फ़ अल्लाह के लिए और इस के रसूल( ﷺ) के लिए और मो मनों के लिए है मगर मुनाफ़क़ीन(इस हक़ीक़त को) जानते नहीं हैं।’’

अल्लाह रब अलाज़त ने मो मुनियन में उलमएहक़ को भी इज्जत बख्शी,उन की फिहरिस्त बहुत बड़ी है सारी

दुनिया में अल्लाह के ऐसे नेक बंदे हैं और ता कयामत रहीं गे।

अख़लाक़ की तालीम की अहमियत:

अल्लाह रब अ लाज़त अपने महबूब ﷺ के बारे में क़र आन मजीद में इरशाद फर मारहा है।वान्नक लाला ख़लक़ अजीम।

तर जमा:और बेशक तुम्हारी ख़ू बो(ख़ल्क़) बड़ी शान की है।(कंज़ अलायमान)

अल्लाह के महबूब ﷺ ने इरशाद फर माया: अन्माबिअसत ला तुमम मक्का र म अलख़लाक़। मेरी बिअसत दुनिया में अख़लाक़ की तालीम मुकम्मल कर ने के लिए हुई है, जिन के बारे में कुरआन ऐलान फर मारहा है कि आप अख़लाक़ क्रीमाना के अज़ीम पीकर हैं उन्हें का फर मान आलीशान है:

‘‘अन् अलालमा विरस उला नबीआइ वान अलांबीआइ लिम यूर्र सू देना रब्बा विलादरहुमा वान्मा विरसो अलालम फमन अख़ज़ा अख़ज़बहज़ वा फर‘‘ ।उलमा ए द यन अंबिया ए कराम के वारिस होते हैं इस में कोई शुबह नहीं कि अंबियाए कराम देना रो दिरहम के वारिस नहीं बनाते हैं वह तो इल्म का वारिस बनाते जिस ने दीन का इल्म हासिल कर लिया इस ने पूरा हिस्सा पालिया। (संन तर मज़ी, बाब मा जा फ़ी फजल अल्फ़िक़ा इल उलाबा द, हदीस 2682 ,6297 , 593)

ज़ाहिर सी बात है जब उलमा वारिस अंबिया हैं तो उन्हें पर जिम्मा है की हुज़ूर ﷺ की विरासत इल्म व अमल,इबादात व अख़लाक़ पर पूरी तरह से अमल पेरा हूँ,तभी तो लोग देख कर अमल पेरा हूँ गे। हमेशा उलमाए हक़ कुरआन व सुन्नत की रोशनी में अपने किरदार व आमाल और अक़ाइद व नज़रियात के ऐतबार से अल्लाह की मख़लूक़ के लिए नमूना अमल रहे हैं और आगे भी रहीं गे।

उन उलमा ए हक़ में बहुत से उलमा का नाम इस दौर इन्पतात (ज़वाल) में भी है। बुला शुबह उन्हें में एक नुमायाँ नामـ’’ हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान अल्लामा मुफ्ती आफ़ाक़ अहमद मुजद्दिदी ‘‘काभी था आप सही माअनों में इस दौर इन्पतात में अल्लाह की मख़लूक़ के लिए वारिस अंबिया की जिम्मा दारी अपने किरदार व अमल से निभा रहे थे। नाचीज़ की पहली मुलाक़ात 7मार्च 2019 इंटर नेशनल कान्फ्रेंस जश्न मौला अली जीर एहतिमाम फ़रोग़ तसव्वुफ़ फाऊंडेशन अल-जामिआ अ लाहमदिया अस्सुन्निया अहमद नगर क़न्नौज यूपी में हुई, नूरानी चेहरा इंतिहाई सादगी और इल्मी रोब से भर पुर शख्सियत देख कर दिल उन की तरफ़ खींचता चला गया और फिर दोतीन बयानात सुनने से आप का इल्मी रोब मुझ पर तारी हो

गया,नेक लोगों को देख कर अल्लाह याद आता है क्यों कि वह अल्लाह की याद में लगे रहते हैं और सुन्नत नबवी पर अमल की बरकत से अ नके चेहरे पर नूर मुहम्मदी ही का फ़ैज़ मौजूद रहता है।हज़रत अमरो बिन जमूह रिवायत करते हैं कि हुज़ूर नबी अकर्म ﷺ ने फ़रमाया:

اِنَّ اَحِبَّائِیی وَاَوْلِیَا ئِیی ا لَّذِیْنَ یَذْکَرُوْنَ بِذِکْرِی، وَاذْکَرْ بِذِکْرِھِمْ۔(احمد بن حنبل، المسند، 3:430 حدیث: 15 588)’’

बे शक मेरे अहबाब और औलिया वह लोग हैं कि मेरा ज़िक्र करने से वह याद आजाते हैं और उन का ज़िक्र कर ने से में यादआजाताहों(यानी मीराज़िक्र उन की याद दिला ता है और उन काज़िक्र मेरी याद दिलाताहै‘‘।(याद रहे अल्हम्दुलललाआ नाचीज़ शहजादा आला हज़रत हज़रत मौलाना मुस्तफ़ा रज़ा ख़ान बमशहूरहुज़ूर मुफ्ती आज़म हिंद अलैहि अर्रहमा से बीअत का शरफ़ रखता है,आप के फ़ैज़ान कर्म से मालामाल है) में जल्दी किसी से मर अऊब नहीं होता यह भी हमारे पेरो मुर्शद का फ़ैज़ है।आज कल जलसे जलूसों के माहौल में कुछ कम इल्म उलमा नज़राना के लालच में दुनिया दार आलम व पीर की तारीफ़ में मुबालग़ा आराई से नहीं बल्कि झूठी तारीफ़ें करते नज़र आते हैं,(कुछ को छोड़ कर उला मा शा अल्लाह हालात बहुत अफसोस नाक हैं)।

खुशबूओं का शहर, खुशबू दार लोग:

क़न्नौज बहुत प्राना तारीख़ी टाऊन है तारीख हिंदोस्तान के मुताबिक क़न्नौज की दूसरी दुनिया की दूसरी या तीसरी आबादी है,जिसे हज़रत आदिम अलैहि अस्सलाम के बेटे क़ाबील ने आबाद किया था। क़दीम जमाने में यह शहर पूरे गैर मुनक़सिम हिंदोस्तान की राज धानी भी रहा है। तारीख फरिश्ता के बयान से इस की वसात का अंदाजा लगाया जा सकता है, नीज़ अरसा दराज़ तक शुमाली हिंद की राजधानी रहाहै। इस शहर को यह शरफ़ भी हासिल है कि इस में तीन सहाबआ कराम रज़ि अल्लाह अन्हु के मज़ारात मुक़द्दसा हैं‘‘अलासाब फ़ी तमीज़ अलसाब’’ में इस की सराहत मौजूद है, नेज़मुख्तलिफ़ सलासल के कई बुजुर्गों के मज़ारात भी इस की अज़मत रफ़्ता के गवाह हैं,जैसे हज़रत हाजी शरीफ़ ज़िंदनी, हज़रत बाला पीर साहिब,हज़रत सुलतान पीर, हज़रत मख़दूम अख़ी जमशेद, हज़रत मख़दूम जहानियां रहमहम अल्लाह, नीज़ हज़रत ख़्वाजा गरीब नवाज़ रहमताल्लाह अलैहि के ख़ास ख़लीफ़ा हज़रत शैख़ अहमद रहमताल्लाह अलैहि भी यहाँ तशरीफ़ लाये और यहीं मदफ़ून हुए,आज भी आप के नाम से मुहल्ला अहमदी टू ला आबाद है। यह शहर तिजारत व मईशत के ऐतबार से भी बहुत मशहूर है,यहाँ का इतर भी

बहुत मशहूर है और पूरी दुनिया में जाता है और क़न्नौज को’’इतरो इतेहास‘‘ की नगरी भी कहा जाता है शहर की आबादी कई लाख है,तक़रीबन45फीसद मुसलमान आबाद ई है और अहलसन्नत की अक्सरीयत है वाज़िह रहे की इतर की तिजारत पर अब मुसलमानों का ग़लबा नहीं रहा बिरादरान वतन भी खूब खूब कुमारहे हैं। खुशबूओं के शहर में खुशबू दार लोगों में यकीना’’हुज़ूर बहरा लारफान अल्लामा मुफ्ती आफ़ाक़ अहमद मजद दी अलैहि अर्रहमा भी थे और अब आप हमेशा के लिए वहीं के होके रह गए इल्म की रोशनी फैलाई,अपनी मुहब्बत से लो गों को माला माल किया आप की शख्सियत पर बहुत कुछ लिखा जासकता है लिखा जाए गा में किया लिखों में अपने को इस लायक नहीं समझता।

हुज़ूर बह्र उलार फ़ान का अख़लाक़ और मुहब्बत: में जमशेद पुर से क़न्नौज 7 मार्च2019 कोपहुंचा अस्र की नमाज़ में हुज़ूर बह्र अ लारफान मुफ्ती आफ़ाक़ अहमद मुजद्दिदी से मुलाक़ात हुई बहुत मुहब्बत औरप्यार से मिले,हज़रत मो लानाआसिफ़ रज़ा (एडीटर पैग़ाम सुकून) साहिब ने तआरुफ़ किराया आप ने खुशी का इज़हार फर माया और पूछा सफर में दुश्वारी तो नहीं हुई ऐसे खैरियत तो बहुत मुहब्बत कर ने वाले ही दरयाफ्त करते हैं,आप ने हज़रत मौलानागलबीज़ आफ़ाक़ी को हिदायत देकर उन के हवाले कर दिया,8 मार्च इलजामाबा लाहमदिया अस्सुन्निया खानगाह मुजद्दिदय की शानदार खूबसूरत मस्जिद में जुमा की नमाज़मीं हाजिरी हुई।बाद नमाज़ जुमा ‘‘इंटर नेशनल का नफ्रंस जश्न मौला अली’’ के शुरू आती पर्व ग्राम फ़ातिहा ख़वानी में हज़रत मौलानाआसिफ़ साहिब का बयान हुआ इसी दरमियान हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान ने मुझ से दरयाफ्त फर माया आप बयान करें गे। में ने अर्ज़ किया कि आप हुक्म फर माएं तो करूँ गा,आप ने फर माया दस मिनट आप हज़रत मौला अली की शान बयान करें हज़रत के हुक्म पर नाचीज़ ने ख़लीफ़्त उलमुस्लिमीन हज़रत मौला अली कर्म अल्लाह वजहा उलक्रीम की शान में कुरआन व अहादीस की रोशनी में बयान किया पूरी मस्जिदुभरी हुई थी और तमाम लोग नारे तकबीर अल्लाह अकबर की सदाएं बुलंद कर रहे थे बयान करते हुए हम ने तीन मिनट और मांगा हज़रत ने फर माया खूब इतमीनान से आप बयान करें,अलहम्द लल्लाआ तक़रीबन18मिनट बयान हुआ फ़ातिहा ख़वानी के बाद आप ने बहुत दुआओं से नवाजा। मौलाना आसिफ को फिर याद दहानी कर उई कि हाफ़िज़ साहिब को जहां मेहमान ठहरे हैं वहाँ पहुँचाइए और जो ज़रूरत हो मुहैया कीजिए(यादरहे में मदरसे के मेहमान ख़ाने में रुका था) लेकिन जहां मेहमान उलमाओं कोठहराया गया थावहां हज़रत मो लाना नबील अख्तर कोलका तह, हज़रत मौलाना मंज़र मुहसिन साहिब, हज़रत मौलाना अनिवार बरेली शरीफ़,अली गढ मुस्लिम यूनी वर्सिटी के प्रोफेसरॉन हज़रात वगैरह वगैरह सब से अच्छी मुलाक़ात रही।

दूसरे दिन 9 मार्च बरोज़ सनेचर कान्फ्रेंस का पहला दौर: क़न्नौज के ही रहने वा ले र इटायर्ड फ़ौजी ऑफीसर ख़ान साहिब जिनकी उम्र 88साल थी उन्हों ने बहुत अहम औरमालूमाती बातें बताएं,इस के बाद हज़रत के हुक्म पर नाचीज़ को बयान का मौका मिला जो मक़ाला मौला अली कान्फ्रेंस के लिए हज़रत के हुक्म पर लिखा था(हज़रत मौला अली अ लम्र्तज़ा कर म अल्लाह वजहा उलक्रीम बहैसीयत ख़लीफ़्त उलमुस्लिमीन) के पाँचवीं पेरा ग्राफ की सब हेडिंग’’हज़रत मौला अली की खिलाफत में उर बी ग्रामर की इबतिदा‘‘ हज़रत ने इंगुली रख कर फर माया आप इस पर बयान करें नाचीज़ ने तक़रीबन37मिनट इस पर बयान किया,हज़रत मौला ना मुजाहिद हसीन हबीबी कोलकाता और मशहूर इस कालर जनाब समीर सिद्दीक़ी वगैरह ने पसंदीद गी का इज़हार फर माया और हज़रत ने दुआ ओं से नवाजा। कान्फ्रेंस के कई मर हल्ले हुए हज़रत तशरीफ़ रखते थे और मुस्कुराते चेहरे से दुआओं से नवाज़ ते में ने वहाँ बहुत कुछ देखा किया किया लिखों। ख़ास कर इल्मी मैदान में आप का काम देखते बनता है उन शा अल्लाह इस पर में जरूर कुछ लिखने की कोशिश करूँ गा मज़मून की तवालत का ख़ौफ़ है।

बह्रुल-इरफ़ान का तक़्वा और सादगी: जिम्मा दार लोगों से सन्नी हुई कुछ बातें मुताला फर माएं।हज़रत मौलाना इसहाक़ अंजुम फ़ैज़ी मिस्बाही विशाख़ा पट्टनम (जो की अस्नाम शकुन के एडीटर हैं1993 से मुसलसल निकाल रहे हैं , दीन मतीन और उर्दू की खद मत कर रहे हैं) आप बेहतरीन सलाहीयत के आलम हैं,लेकिन विशाखा पट्टनम में आप शाएअर और अंजुम के नाम से मशहूर हैं,1953से1957तक जमशेद पुर में अल्लामा अर्शदालक़ादी अलैहि अर्रहमा,मौलानाममता,मौलाना गुलाम रसूल, मास्टर सय्यद एजाज़ साहिब जैसे अकाबरहज़रात से इल्म हासिल किया,फिर अशर्फिया में 1958 से 1960 तक हुज़ूर हाफ़िज़ मिलित अलैहि अर्रहमा, हुज़ूर मुफ्ती अब्द उलमनान,मौलानामजफर हसीन ज़फ़रादीबी, साहिब जैसे इल्म वालों से इल्म हासिल किया इस वक़्त उन की उम्र76साल है, वह जल्दी किसी आलम और पीर से मरऊब नहीं होते, उन को जब में ने हज़रत बहरा लार फ़ान के विसाल की खबर दी तो वह बहुत ग़मगीन हुए आवाज़ भर आई, उन्हों ने अपने और अपनी फैमिली के मुरीद होने का सबक आमोज़ वाक़ा बताया मुख़्तसर में आप मुताला फर माएं।हज़रत बह्र उलार फ़ान विशाखा पट्टनम जाया करते थे और मौलाना इसहाक़ अंजुम फ़ैज़ी मिस्बाही के घर भी जाया करते थे अपने मुरीद होने का वाक़ा यों बयान फर माते हैं,हज़रत बह्र अ लार फ़ान जब भी मेरे घर तशरीफ़ लाते तो में तो में अहले ख़ाना के लिए भी दुआ की गुजारिश कर ता,हज़रत हमेशा निगाहें नीची रखते हुए सब को दुआएं देते दम फर माते हज़रत का तक़्वा और सादगी देख कर मेरे दिल

में हज़रत की इज्जत बहुत बढ़ गई , में और मेरी फैमिली2013 हज़रत से बीअत का शरफ़ हासिल किया।हज़रत मौलाना उसमान अंजुम फ़ैज़ी मिस्बाही ने आप की कई बातें बयान की उन शा अल्लाह अगले मक़ाला में लिखने की कोशिश करूँ गा।

बह्रुल-इरफ़ान की इल्मी खद मात:

आप ने इल्मी मैदान में नुमायाँ काम किया है इस पर लिखा जाना चाहिए,लिखा जाए गा भी,क़न्नौज टाऊन में ही नहीं आप की इल्मी ख़िदमात दूसरे सूबों विषहरों में नुमायाँ हैं।मरी पालम,विशाखा पट्टनम में खानगाह आफ़ाकिया मुजद्दिदय,कटनी,मध्य परदेस , खानगाह आफा क़िया मुजद्दिदय, शाहीन बाग दिहली, सिलक्टरचंडी गढ़, बनारस वगैरह में भी आप ने इल्म की रोशनी फैलाई। खानका हूँ को तज़किया नफ़्स के लिए , मदारिस इस्लामीया इस्लाम के फ़रोग़ के लिए और दुनिया भी कामयाब रहे आप ने असरी उलूम हासिल करने के लिए आप ने स्कूलों की तामीर भी कराई न सिर्फ़ लड़ कों बल्कि लड़ क्यों की तालीम के लिए भी आप ने जामाबा लम्हसनात की तामीर फर माई,वारसी पब्लिक स्कूल: यह इंटर मीडियट इंग्लिश स्कूल है और क़न्नौज के स्कूलों में अव्वल नंबर पर आताहै। अल-जामिआ अल-अहमदिया की मौजूदा इमारत से मुत्तसिल है इस में तालीम हासिल कर रहे तलबा तालिबात की तादाद पांच सौ से ज़्यादा है असातिज़ा की तादाद भी 25 के क़रीब है सर हिंद पब्लिक स्कूल जो आबादी से बाहर बना है देखते ही बनता है वसीअ वारीज़ जगह स्कूल अंदर बड़ा मैदान ,मौला अली कान्फ्रेंस का प्रोग्राम भी इसी मैदान में हुआ जिस में आई पी एस वबड़े बड़े उलमा मुल्की व बैरूनी बंगला देश , पाकिस्तान, लेबनान वगैरह तशरीफ़ लाये बेन अलअक़वामी शख्सियत के मालिक ’’शैख़ उम्र अल्फ़ाखानी‘‘ लेबनान भी तशरीफ़ लाये और सर हिंद स्कूल की बिल्डिंग के अंदरूनी मैदान में आप का भी बयान हुआ, बयान के बाद मिला कात हुई बहुत मुहब्बत से मिले में ने पिछली मिला कात की यादहानी कराई1997 में केरल, काली कट में इल्सक़ाफ़्त अस्सुन्निया के होटल ( काली कट टावर) में प्राइम मिनिस्टर आफ इंडिया मिस्टर एच ।डी।देवे गौड़ा के साथ मुलाक़ात हुई थी ,जिस में हज़रत मौलाना मुबियन अलहदा, झाड़ खंड के मुफ्ती वफ़ीज़ उलउलूम के शैख़ अलहदीस हज़रत मुफ्ती आबिद हसीन नूरी साहिब और में हाफ़िज़ मुहम्मद हाशिम कादरी सिद्दीक़ी मिस्बाही, शीह उम्र उल्फा खानी विशेख़ अबू बुकर साहिब विदीगर लोग मौजूद थे पिछली याद दहानी कराने पर बहुत खुश हुए बगल गीर हुए बहुत मुहब्बत का इज़हार फर माया और दुआओं से नवाजा।

बह्र उलार फ़ान की वफ़ात अहले सुन्नत का अज़ीम ख़सारा: मौत बुर हक़ है मौत सभी को आनी है इस पर ईमान है।؎

मौत इस की है करे जिस का ज़माना अफसोस

यों तो दुनिया में सभी आये हैं मरने के लिए

मौत अलालम मौत अलालम:

एक आलम दीन की मौत पूरे आलम(पूरी दुनिया) की मौत है, बरहक़ है। आप के विसाल की खबर पाकर मुल्क के गोशे गोशे वबेरोन मुल्क से भी आप की ताज़ियत पर लोगों के पैग़ाम आये ,चिश्ती,सिहर वर्दी, अशरफी, वारसी, नक़्शबंदी,मुजद्दिदी, कादरी, बुर काती, और अकाबिर सादाद कराम व उलमा हज़रात भी शरीक जनाज़ा हुए यह आप की मक़बूलियत का सबूत है आप के जनारा की नमाज़ आप के पीर व मुर्शद हज़रत मौलाना शाह अहमद रज़ा ख़ान कमाल पूरी नक़्शबंदी मद ज़ला अलाली सज्जादा नशीन खानगाह खैरिय नक़्शबंदिया कमाल पुर ज़िला मिर्ज़ा पुर यूपी ने पढ़ाई। पूरे मुल्क और बैरून मुल्क से आप की ताज़ियात का सिलसिला जारी है बड़ी बड़ी खानक़ाहों से जो ताज़ियाती पैग़ामात आये हैं वह पढ़ने से ताल्लुक रखते हैं।

हुज़ूर अमीन मिलित और हुज़ू रफ़ीक मिलित ने जोताज़ियती पैग़ाम भेजा है एक एक हर्फ़ पढ़ने के लायक है। बड़े बड़े मक़ालों में भी वह बात नहीं आसक्ति में किया लिखों मेरी किया हस्ती है, हमारे बड़े सरकारों ने जब बह्रुल-इरफ़ान हुज़ूर मुहम्मद मुफ्ती आफ़ाक़ मुजद्दिदी साहिब अलैहि अर्रहमा को ’’ इल्म का सफ़ीर फर मा रहे हैं तो में किया लिखों। और हक़ विस्च तो यही है की दावत दीन का काम उलमा ए हक़ के लिए ही है, इरशाद बारी तआला है:

وَمَا کَانَ الْمُؤمِنُوْنَ لِیَنْفِرُوْا کَآفَّۃً فَلَوْ لَا نَفَرَ مِنْ کُلِّ فِرْ قَۃٍ مِّنْھُمْ طَآ ئِفَۃٌ لِّیَتَفَقَّھُوْافِی الدِّیْنِ وَلِیُنْذِرُوْااِذَارَجَعُوْٓ الَیْھِمْ لَعَلَّھُمْ یَحْذَرُوْنَ۔ (القرآن،سورہ توبہ:9، آیت122 )

तर जमा: और यह तो हो नहीं सकता कि सारे के सारे मुसलमान (एक साथ) निकल खडे हूँ,तो उन में से हर एक गिरोह( या क़बीला) की एक जमात क्यों न निकले कि वह लोग दीन में तफ़िक़ा (यानी खूब फ़हम वबसीरत) हासिल करें औरअपनी कौम को ड्राएं जब वह उन की तरफ़ पलट कर आएं ता कि वह ( गुनाहों और ना फर मानी की ज़िन्दगी से बचें)।

हदीस पाक में है अल्लाह तआला जिस के लिए बेहतरी चा हता है इस को दीन में फ़क़ीह बनाता है। में

तकसीम कर ने वाला हूँ अल्लाह तआला देने वालाहे (बुखारी,किताब अलालम,बाब मन यर्द अल्लाह ब ख़ैरन एफक्का फ़ी उद्दीन, ज:1, स42, हदीस:71,मुस्लिम किताब अ लज़ का बाब अलंही अन उलमसल स517,हदीस100,1037)

*ख़तीब व इमाम मस्जिद हाजिरा रिज़वीह जमशेदपुर