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Allama Afaque Ahmad Mujaddidiबह्र उल-इरफ़ान: समात व जहातसिलसिला नक़्शबंदिया और खानगाह खैरिय की शान

अध्याय 8 में से 65पृष्ठ 68–72

सिलसिला नक़्शबंदिया और खानगाह खैरिय की शान

सिलसिला नक़्शबंदिया और खानगाह खैरिय की शान हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान रज़ि उलमोली अन्हु

मिंजानिब: खानगाह खैरिय कमालपुर शरीफ़ निराइन पुर ज़िला मिर्ज़ा पुर (यूपी)

आलम रब्बानी पीर लासानी वाकिफ़ रमूज़ शरीअत वतरीक़त बह्र ज़ख़ार इल्म विमार्फत ताजदार रूहानियत आरिफ बिल्लाह बह्र उल-इरफ़ान अल्हाज उलशाह मुफ्ती आफ़ाक़ अहमद साहिब क़िबला नक़्शबंदी मुजद्दिदी रज़ि अल्लाह अन्हु के नागहानी विसाल मुबारक से मजहब व मिलित और तसव्वुफ़ व रूहानियत का अज़ीम ख़सारा हुआ है आप की शख्सियत यक़ीनन इस्लाफ़ की यादगार और अख़िलाफ़ केलिए नमूना अमल थी जो कि अपने वक़्त के मुफ़्तई आज़म हिंदोस्तान थे आप के पीर तरीक़त हुज़ूर शैख़ अलालम अल्हाज उलशाह अहमद रज़ा ख़ाँ नक़्शबंदी दाम ज़ला उलनूरानी बनारसी आप की ज़ात पर लब कुशा होते हुए फ़रमाते हैं ’’मुफ्ती आफ़ाक़ अहमद साहिब कद्दू कामत हसन व जमाल ख़िदमत दीन के ऐतबार से सिलसिला नक़्शबंदिया

के अज़ीम अल्मरतिब्बत बुजुर्ग आल रसूल औलाद अली कुतुब ज़माँ सय्यद अबू अलख़ैरात सेवानी रज़ि अल्लाह अन्हु से हद दर्जा मुशाबहत रखते थे‘‘ अलहम्द लिल्लाह आप की ज़ात उन्हें साहिब कमाल हस्तियों में एक अदीम उलमिसाल हस्ती थी।

खानगाह खैरिय के जुमला अफ़रादमोलमीन व मुतिल्लिमैन बिलख़सूस हज़रत मुफ्ती मुहम्मद अवैस रज़ा ख़ान खेरी साहिब क़िबला हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान रहमत अल्लाह अलैहि के अहले ख़ाना और मुहबीन व मुक़रबीन को ताज़ियत पेश करते हैं और बहकम शैख़ अलालम हफ़ज़ा अल्लाह मदर्रिसा गुलशन मदीना कमालपुर शरीफ़ में ब्यूम विसाल मुबारक हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान रहमत अल्लाह अलैहि कुरआन ख़वानी विदीगर तक़रीबात व इजतिमाई दुआओं का इनइक़ाद किया जा रहा है और यह सिलसिला चहलुम तक मज़ेद जारी रहे गा उन तमाम नशिस्तों का इनइक़ाद मदर्रिसा गुलशन मदीना के सरबराह आली, हज़रत मुफ्ती मुहम्मद अवैस रज़ा ख़ान खेरी साहिब क़िबला नक़्शबंदी के निगरानी में किया जा रहा है। खानगाह खैरिय के सभी अफराद हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान रज़ि उलमोली अन्हु की बारगाह में गुलहाए अकीदत पेश करते हुए अल्लाह रब अलाज़त से दुआ गो हैं कि अल्लाह ताली बुजुर्गों के तुफ़ैल हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान रहमत अल्लाह अलैहि के दर्जात बुलंद फ़रमा और अहले सुन्नत को नोम अलबदल अता फ़रमा, आमीन।

मुहम्मद अवैस रज़ा ख़ान खेरी नक़्शबंदी

आप कासानिहा इर्तिहाल उम्मत मुस्लिमा के लिए अज़ीम ख़सारा है

सय्यद फख्र उद्दीन अशरफ अशरफी अलजीला नी

सज्जादा नशीन दरगाह मख़दूम जहां गीर समनानी अलैहि अर्रहमा कछौछह मुक़द्दसा अंबेडकर नगर यू पी

हज़रत अल्लामा विमूलाना मुफ्ती आफ़ाक़ अहमद मुजद्दिदी के बारेमें मौलानामुहम्मदजलाल उद्दीन मिस्बाही उस्ताज़ दारउलउलूम मख़दूम अशरफ सेसनाका 12 जूलाई2019 क्वांतक़ाल हो गयागोका मौसूफ़ से मेरी मुलाक़ात न होस्की लेकिन ग़ायबाना तौर पर मालूम हुआ कि आप बाइख़लाक़ मुनकस्रालमिजाज औरमतवाज़ा होने के साथ साथ बहुत सेफ़लाही काम और उम्मत मुस्लिमा केलिये ईमान वाकीदे के तोहफ़्ज़ वबका के लिए मदारिस क़ायम किएजोआप केएहसासात, अफ़्क़ारोख़्यालात औरफ़रोग़ इल्म दीन मुस्तफ़ा की ग़म्माज़ी करते हैं, इस मुनासबत से यह शेअर बजाहोगा؎

हजारों साल नरगिस अपनी बे नूरी पा रोती है

बड़ी मुश्किल से होताहै चमन में दीदा वरपीदा

ऐसी शख्सियतें जोशरीअत,तरीक़त,हक़ीक़त विमार्फत काआईना होती हैं उन के इंतकाल सेआक अज़ीम ख़ला पैदा होजाताहै जिस की तलाफ़ी मुश्किल से हो पाती है ।मौसूफ़ कासानिहा इर्तिहाल उम्मत मुस्लिमा औरखानगाह के लिए अज़ीम ख़सारा का बाइस है मौला तआला मौसूफ़ की मग़फ़िरत फ़रमाए और पस मानदगान को सब्र जमील अता फ़रमाए साथ ही साथ मौसूफ़ के चहलुम के मौका पर आप के तलामज़ा की कोशिश से आप की हयात वख़िदमात पर मुश्तमिल बह्रुल-इरफ़ान नंबर जो शाय हो रहा है इस नंबर को कबूल ख़ास वेआम फ़रमाए औरहुज़ूरनबी क्रीम सिल्ली अल्लाह अलैहि वसल्लम और हुज़ूर मख़दूम समनां के सदक़े में मुफ्ती साहिब की दीनी ख़िदमात को कबूल फ़रमाकर अज्र अज़ीम अताफ़रमाए । आमीन बजाह सय्यद एल्मरसिलीन

अहले सुन्नत विजमाअत के एक मुख़लिस तरिन फ़र्द

हज़रत शाह मुहम्मद सकलेन मियां

ग्रामी क़द्र अज़ीज़म आसिफ रज़ा मुजद्दिदी व दीगर अहले ख़ाना अस्सलाम अलैकुम विरहमसाल्लाह व बरकाता

हज़रत मुहतरम मुफ्ती आफ़ाक़ अहमद साहिब अलैहि अर्रहमा इस में कोई शक नहीं कि दीन का बहुत दर्द रखते थे और अहले सुन्नत विजमाअत के एक मुख़लिस तरिन फ़र्द थे एक शैख़ तरीक़त के साथ साथ मूल्फ़ मुसन्निफ़ भी थे तहरीरोतकरीर से बहुत बहुत फायदा मोतदीन की ख़िदमत अंजाम देने वाले थे अलावा अज़ीं हज़रत मुजद्दिद अल्फ़ सानी रहमताल्लाह अलैहि के चाहने वालों में भी ख़ुसूसीयत के हामिल थे इलजामाचालाहमदिया अस्सुन्निया से हज़रत मुजद्दिद अल्फ़ सानी रहमताल्लाह अलैहि के मिशन को बहुत कामयाबी के साथ ले कर चल रहे थे और इस दीनी मिशन को उन्हों ने बाम उरूज पर लेजाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी जिस के नताइज इलजामाचालाहमदिया की शक्ल में दुनिया के सामने हैं अल्लाह तआला आप के अहले ख़ाना और अहले सिलसिला को तौफ़ीक़ रफ़ीक अता फ़रमाए कि वह हुज़ूर बह्रुल-इरफ़ान के नेक इरादों और तमन्नाओं को बाम उरूज व पाया तकमील तक पहुँचा सकें मुहतरम हुज़ूर बह्रुल-इरफ़ान साहिब इस नाचीज़ के ख़्वाजा ताश और पर ख़ुलूस अहबाब में से थे मुझ ख़ाकसार से मुलाक़ात के लिए कई बार आस्ताना आलीया शराफतीय बरेली तशरीफ़ लाये हैं बरेली में बह्रुल-इरफ़ान साहिब के खिताब की

जो तस्वीर इंकलाब अखबार में छिपी है और फीस बुक पर है वह तस्वीरार्स शराफती ही की है बारी तआला हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान साहिब को ग़रीक़ रहमत फ़रमाए उनकी कब्र पर रहमत व नूर की बारिश फ़रमाए जन्नत अलफ़र्दूस में आला मक़ाम अता फ़रमाए आप सभी पसमानदगान को सब्र जमील अज्र जज़ील से नवाज़े अगर सेहत ने इजाजत दी तो चालीसवीं के उर्स में शिरकत का इरादा है, फ़क़त वस्सलाम:

खानगाह शराफतीय,मुहल्ला शाह आबाद, बरेली शरीफ़

मुफ्ती आज़म क़न्नौज

सय्यद हमज़ा अशरफ

जानशीन शैख़ उलइस्लाम , कछौछह मुक़द्दसा

बह्र उल-इरफ़ान हज़रत अल्लामा मौलाना मुफ्ती आफ़ाक़ अहमद मुजद्दिदी साहिब मुफ्ती आज़म क़न्नौज रहमत अल्लाह अलैहि के इंतकाल पर मलाल पर हम जुमला अफराद खानगाह आलीया कादरिया चिश्तिया अशर्फिया कछौछह शरीफ़ की जानिब से बिलउमूम और वालिद बुज़ुर्गवारशेख़ उलइस्लाम व उलमुस्लिमीन हज़रत अल्लामा सय्यद मुहम्मद मदनी मियां साहिब क़िबला दामत बरकाथम अलालिया की जानिब से बिलख़सूस ताज़ियत पेश करते हैं , अल्लाह तआला आप की बे हिसाब मग़फ़िरत फ़रमाए और उनके जुमला अफराद , खानदान व मुरीदैन व मोतक़िदीन व मुतवस्सिलीन को सब्र जमील अता फ़रमाए ,आमीन।

अहले सुन्नत विजमाअत के बा अमल आलम

आल इंडिया उलमाउमशाइख़ बोर्ड दिहली

अफसोस! सद अफसोस!

सिलसिला नक़्शबंदिया के अज़ीम सोफी और तालीमात नक़्शबंदिया के शाहकार मबलग़ हज़रत मौलाना मुफ्ती आफ़ाक़ अहमद जामई मुजद्दिदी नक़्शबंदी रहमताल्लाह अलैहि (उलमारूफ़ ब मुफ्ती शहर क़न्नौज ) के इंतकाल पर मलाल पर आल इंडिया उल्मामशाइख़ बोर्ड ताज़ियत पेश करता है मौसूफ़ अहले सुन्नत विजमाअत के बा अमल आलम थे और मौसूफ़ ने अहले तसव्वुफ़ की तालीमात को शहर क़न्नौज के साथ साथ दीगर मुक़ामात पर भी उजागर किया जिन की तालीमात को

फ़रामोश नहीं किया जा सकता और आप के मर्कज़ी इदारा अल-जामिआ अल-अहमदिया और उसकी ज़ेली शाखों से नयी नस्ल मुस्तफ़ीज़ हो रही है ।

आल इंडिया उल्मा व मशाइख़ बोर्ड के सदर हज़रत सय्यद मुहम्मद अशरफ किछौछवी को खबर मिलते ही सदमा ला हक़ हुआ आपने कहा एक और रूहानी शख्सियत हमारे दरमियान से रुखसत हो गइ ।हम दुआ करते हैं कि रब अलालमीन उन्हें जन्नत अलफ़र्दूस में आला मक़ाम अता फ़रमाए और उनके लवाहिक़ीन को सब्र जमील अता फ़रमाए ।आमीन