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अध्याय 10 में से 65पृष्ठ 76–79

मजहबी वसमाजी रहनुमा

शैख़ अबू बुकर अहमद ग्रांड मुफ्ती आफ इंडिया

मुफ्ती आफ़ाक़ अहमद मुजद्दिदी की रहलत की खबर से पूरे मुल्क में ग़म की लहर दौड़ गई है । ग्रांड मुफ्ती शैख़ अबू बुकर अहमद ने आफ़ाक़ी शहरतों के मालिक हज़रत मुफ्ती आफ़ाक़ अहमद के इंतकाल पर रंज व ग़म का इज़हार किया है।शैख़ ने अपने ताज़ियती पैग़ाम में कहा कि मुफ्ती आफ़ाक़ अहमद मुजद्दिदी क़ाज़ी शहर क़न्नौज दीन मतीन के सच्चे अलमबरदार थे । अपनी पूरी ज़िन्दगी मिलित इस्लामीया की फ़लाह व बहबूद में सिर्फ़ कर दी मौसूफ़ मजहबी समाजी रहनुमा थे।आप ने मुख़तलिफ़ दीनी व असरी उदारों की बुनियाद डाली ,और गरीब व मिस्कीनों की इमदादमें पेश पेश रहते थे।

आप के इंतकाल से इल्मी व समाजी हलकों में एक ख़िला पैदा हो गया है ।जो मिलित इस्लामीया के लिए अज़ीम ख़सारा है । अल्लाह तआला की बारगाह में दुआ है कि मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए और पसमानद गान को सब्र जमील अता करे ।आमीन या रब अलालमीन अना लिल्लाह वाना इलिया राजावन

हमारे बहुत ही अच्छे बुजुर्ग थे

मौलाना इलियास कादरी

अमीर दावत इस्लामी पाकिस्तान

हज़रत मौलाना अहमद सईद मुजद्दिदी साहिब मदर्स अल-जामिआ अल-अहमदिया व हज़रत मौलाना बरकात अहमद मुजद्दिदी साहिब मदर्स अल-जामिआ अल-अहमदिया क़न्नौज की खिदमतों में

अस्सलाम अलैकुम विरहम अल्लाह वबरकाता ,

आप के वालिद मुहतरम, मबलग़ दावत इस्लामी, हमारे कर्म फ़रमा, पीर तरीक़त हज़रत अल्लामा मौलाना मुफ्ती आफ़ाक़ अहमद मुजद्दिदी नक़्शबंदी के बारे में यह इत्तिला मिली कि 9/ ज़ीक़ाद उलहराम 1440 हिजरी को क़न्नौज उतर प्रदेश में विसाल फ़रमागए , यारब अलमुस्तफ़ा जल जलाला वस्ली अल्लाह तआला अलैहि व आला वसल्लम हज़रत मौलाना मरहूम मुफ्ती आफ़ाक़ अहमद मुजद्दिदी नक़्शबंदी साहिब को ग़रीक़ रहमत फ़रमा, या अल्लाह उनकी बे हिसाब मग़फ़िरत फ़रमा,या अल्लाह उनकी कब्र पर अनिवार वितजल्लियात की बरसात फ़रमा, इलाह अलालमीन उन की कब्र ता हद निगाह वसीअ होजाए , या अल्लाह उनकी कब्र जहां तक नज़र पहुँचे वसीअ होजाए, बहुत बड़ी होजाए चौड़ी हो जाए,नूर मुस्तफ़ा ﷺ के सदक़े नूर से भर जाए, या अल्लाह उन्हें बे हिसाब मग़फ़िरत से मुशर्रफ़ फ़रमाकर जन्नत अलफ़र्दूस में अपने प्यारे हबीब सिल्ली अल्लाह तआला अलैहि व आला वसल्लम का पड़ोस नसीब फ़रमा, याउल्ला उनके सोगवारों को सब्र जमील और सब्र जमील पर अज्र जज़ील मरहमत फ़रमा मौला क्रीम मेरे पास जो भी टूटे फूटे आमाल हैं उन्हें कबूल फ़रमा , अपने कर्म के शायान शान उन का अज्र अता फ़रमा , यह सारा अज्र व सवाब जनाब रिसालत मआब सिल्ली अल्लाह तआला अलैहि व आला वसल्लम को अता फ़रमा बोसीला रहमत लला लिमीन सिल्ली अल्लाह तआला अलैहि व आला वसल्लम हज़रत क़िबला आफ़ाक़ अहमद मुजद्दिदी नक़्शबंदी साहिब समेत

सारी उम्मत को इनायत फरमाआमीन बजाह उन्नबी अलामीन सिल्ली अल्लाह तआला अलैहि व आला वसल्लम।

में तमाम सोगवारों से ताज़ियत करता हूँ सलवा अली अलहबीब सिल्ली अल्लाह तआला अला मुहम्मद , हमारे बहुत ही अच्छे बुजुर्ग थे, में ने उनकी ज़ियारत भी की है और हमारा साथ भी देते थे दावत इस्लामी के मदनी काम में ,उनकी वसातत से हम एक बार क़न्नौज भी गए थे रात में उतरे थे वहाँ सलवा अली अलहबीब सिल्ली अल्लाह तआला अला मुहम्मद।

अहले सुन्नत की रगों में निया खून फिरा हम किया है

पीर सेदगुलाम हसीन शाह जैलानी नक़्शबंदी

सरबराह आली वबानी जामिआ सिद्दीक़ीय सूजा शरीफ़ ज़िला बाड़मेर राजस्थान इंडिया

मुहतरम उलमुक़ाम साहबज़ादगान व मुंसलिकेन हज़रत अला मुह मुफ्ती आफ़ाक़ अहमद विजमला अरा केन जामिआ अहमदिया क़न्नौज

अस्सलाम अलैकुम व रहमत अल्लाह व बरका तह

बादा ।हज़रत अला मुह अल्हाज बह्र उल-इरफ़ान मुफ्ती आफ़ाक़ अहमद मुजद्दिदी नक़्शबंदी का अचा निक हा दसा इर्तिहाल यक़ीनन काबिल सद अफसोस है ऐसे मुख़लिस और सच्चे दीन के ख़ुदाम की आज के दौर में अहले सुन्नत को अशद ज़रूरत है उन्हों ने अपनी लग्न और इख़लास की बदौलत मुख़्तसर अरसा में दीन का बहुत बड़ा काम किया ,जामिआ अहमदिया क़ायम फर माकर न सिर्फ़ यहाँ बल्कि पूरे हिंदोस्तान व बैरून हिंद अहले सुन्नत की रगों में निया खून फिरा हम किया है ,यह उन का ज़िंदा जावेद गुलशन उन को हमेशा ज़िंदा रखे गा क्यू निका ,,मिन सार बालालम हयन लिम यमत अबदन ,, जामिआ सिद्दीक़ीय सौ जा शरीफ़ और इस की तहरीक सिद्दीक़ी से उन को जो ख़ुसूसी ताल्लुक था वह आप हज़रात से मख़फ़ी नहीं जिस साल तशरीफ़ लाये फिर ता ज़िन्दगी इस आमद व रफ्त को क़ज़ा न हो ने दिया अपने मुफीद मशविरों से नवा ज़ते रहे ,उन्हें वाक़ई संयत का दर्दथा शब् व रोज़ इसी फ़िक्र में रहा करते थे कुछ कर गुजरने की धन हिम्मा वक़्त जेहन पा सवार रहा करती थी ।वह अल-जामिआ अल-अहमदिया को अज़हर सा नी बना ना चा हते थे मगर ज़िन्दगी ने वफ़ा न की ।मौला ता ला पस मानदगान, मर्यदान बावफ़ा व अरा केन को सब्र जमील के साथ नोम अलबदल अता करे और मुफ्ती साहिब मरहूम का ख्वाब शर्मिंदा ताबीर हो ।

हम अहले इदारा व मदरसेन व अराकीन वतलबा बल्कि सैकड़ों सिद्दीक़ी शाखों उन के मुंतज़मीन व असातिज़ा व तलबा आप हज़रात के इस ग़म में बराबर के शरीक हैं मौला ता ला उन की खद मात को कबूल फर मा कर जन्नत अलफ़र्दूस में आला मक़ाम अता फर मा ए हमें उन के मिशन को ज़िंदा रखने और संयत की मुख़लिसा न खद मत की नेक तो फ़ीक़ अता फर मा ए। आमीन बजाह हबीबा उलक्रीम अलैहि इलतहीत वालतसलैम ।

वह एक मुख़लिस आलम व मुफ्ती थे

मौलानासेद मुहम्मद अख्तर चिश्ती मिस्बाही

सज्जादा नशीन खानगाह आलीया समदीय मिस्बाहीया दारउलख़ैर फफूंद शरीफ़ ओरिया

अजीज़ ग्रामी मौलाना अहमद सईद स्लिमा उलमौला तबारक व तआला,

अस्सलाम अलैकुम व रहमत अल्लाह वबरकाता मा अदीय वाफ़रा!

में सफर से आस्ताना आलीया समदीय मिस्बाहीया फफूंद शरीफ़ वापस हुआ तो यह खबर मौसूल हुई कि मुहब् ग्रामी हज़रत मौलाना आफ़ाक़ साहिब ग़फरुल्लाह ला वबरद अल्लाह मुज़्जआ दार दुनिया से कोच करके दार आख़िरत की जानिब रहलत फ़रमा गए ,अना लिल्लाह वाना इलिया राजावन ,यह खबर सन कर बहुत अफसोस हुआ ।

मगर मालिक वहदा लाशरीक का इरशाद ग्रामी ,कल नफ़्स ज़ायक्त उलमौत ,अपनी जगह अटल है और इस मंज़िल से हर एक को हमकनार होना है ।

वह एक मुख़लिस आलम व मुफ्ती थे ,उन की ज़ात से इस इलाक़ा में अहम दीनी ख़िदमात अंजाम पा रही थीं ।उन के तशरीफ़ ले जाने से इस इलाक़ा में ऐसा ख़ला हुआ कि जिस की तलाफ़ी बजाहिर मुश्किल है ।

जुमला अफराद ख़ानवादआ आलीया समदीय मिस्बाहीया आप के इस ग़म में बराबर के शरीक हैं और दुआ करते हैं कि रब समद व अहद मुफ्ती साहिब को जन्नत में आला मक़ाम अता फ़रमाए ,दर्जात बुलंद फ़रमाए ,और तमाम वारसीन व मुहबीन को सब्र व अज्र की दौलत से नवाज़े ,और उन के छोड़े हुए मिशन को पाया तकमील तक पहुँचाए । आमीन बजाह सय्यद एल्मरसिलीन ﷺ।