अध्याय 11 में से 65पृष्ठ 80–83
आह!मिलित का अज़ीम ख़सारा
मौलाना सय्यद नूरानी मियां साहिब अशरफी कछौछह मुक़द्दसा
अस्सलाम अलैकुम विरहम अल्लाह व बरकाता
में इस वक़्त आज यहाँ कनाडा ,टोरेंटो में हूँ और आज ही जैसे उठा में एक इंतिहाई अंदोहनाक खबर हिंदोस्तान से मौसूल हुई,जहां हमारी जमात केइंतिहाई अज़ीम स्कालर,इंतिहाई अज़ीम आलम , इक मिलित का दर्द रखने वालेबेहतरीन मुफ्ती,हज़रत अल्लामा मुफ्ती आफ़ाक़ साहिब क़िबला नक़्शबंदी जो अल्लाह की रहमत की जानिब मुंतक़िल हुए ,हमारी आंखों से रुपोश हुयनिका इंतकाल हो गया है अना लिल्लाह व अना इलिया राजावन , मौला क्रीम उन्हें ग़रीक़ रहमत फ़रमाए ज्वार रहमत में मक़ाम अता फ़रमाए ,हज़रत मुफ्ती साहिब क़िबला से मेरा बड़ा ही देरीना ताल्लुक था ,बड़ी शफकत फ़रमाते थे , और एक दो बार मेरा क़न्नौज में जाना भी हुआ, जहां पा एक अज़ीम उलशान इदारा भी क़ायम फ़रमाया है,बस मेरी यह दुआ है कि मौलाए क्रीम मुफ्ती साहिब के खानदान में ही कोई नोम अलबदल अता फ़रमाए , और उनके जानशीन को ’’उलवलुद सर लाबेह ‘‘का मिस्दाक़ बनाएऔर उनके अहले खानदान और तमाम अहले अकीदत को सब्र जमील अता फ़रमाए।
उबर रहमत उन की मर्क़द पर गहर बारी करे
हश्र तक शान क्रीमी नाज़ बरदारी करे
बुलंद पाया इल्मी ख़िदमात
अल्हाज शहजादे मियां शेरी मुजद्दिदी *
जानशीन व वली अहद व जुमला साहबज़ादगान हज़रत बह्र उल-इरफ़ान अलैहि अलरहम वालरिज़्वान
अस्सलाम अलैकुम विरहम अल्लाह व बरकाता
13/ जुलाई 2019 कवितर्जमान खानगाह शेर्य अज़ीज़ी मौलाना हाफ़िज़ व क़ारी अल्हाज अनिवार अहमद शेरी स्लिमा अलकवी से पीर तरीक़त बह्र उल-इरफ़ान हज़रत अल्लामा उलशाह मुफ्ती आफ़ाक़ अहमद साहिब क़िबला मुजद्दिदी नक़्शबंदी नूर अल्लाह मर्क़दा की रहलत की खबर मिली , बे साख़ता ज़बान से’’ अना लिल्लाह व अना इलिया राजावन ‘‘ निकला । खानगाह के सारे अफराद ने यह
खबर सन क्राफसोस का इज़हार किया , और हज़रत के दर्जात की बुलंदी के लिए दुआएं करने लगे । हज़रत बह्र उल-इरफ़ान इल्मी दुनिया में जहां दर्स वितदरीस के आला ओहदों पर फ़ाइज़ थे वहीं दूसरी जानिब करता स वक्लम के मैदान में भी अपनी बुलंद पाया इल्मी ख़िदमात का मुज़ाहिर ह फ़रोग़ तसव्वुफ़ के हवाले से फ़रमा रहे थे, वह एक अज़ीम शैख़ कामिल और सच्चे पेरतरीक़त व शरीअत थे , जो मख़लूक़ को राह रास्त पर लाने काकाम कर रहे थे, औरिया सब बफ़ज़्ल ख़ुदा हज़रत इमाम रब्बानी मुजद्दिद अल्फ़ सानी क़ुद्दिस सरह का फ़ैज़ बे करां है , रब कदीर से दुआ है कि हज़रत की मग़फ़िरत फ़रमाकर दर्जात को बुलंद फ़रमाए , और जुमला पसमानदगान को सब्र जमील की तौफ़ीक़ और इस पर अज्र जज़ील अता फ़रमाए ।
एं दुआ अज़मन वाज़ जुमला जहां आमीन बाद
- खानगाह शेर्य बहेड़ी शरीफ़ , बरेली
अहले सुन्नत का बे बहा सरमाया
सय्यद मुहम्मद शादान शिकवा जाफ़री मदारी
सुबाई सदर आल इंडिया उल्मा व मशाइख़ बोर्ड मकिन पुर
निहायत ही ग़म अफसोस हुआ जब यह उलमनाक खबरबज़रीया वाटसाप मौसूल हुई कि बह्र उल-इरफ़ान हज़रत अल्लामा मौलाना मुफ्ती मुहम्मद आफ़ाक़ अहमद साहिब मुजद्दिदी नक़्शबंदी अलैहि अर्रहमा इस दार फ़ानी से कोच फ़रमा गए ।कल नफ़्स ज़ायक्त उलमौत ,,के तहत मौत सब का मुक़द्दर है मगर किसी की मौत मौत अलालम होती है यकीना अल्लामा मौसूफ़ की ज़ात अहले सुन्नत के दरमियान एक बे बहा सरमाया की हैसियत रखती थी ,अल्लाह तआला अहले सुन्नत को इस का नोम अलबदल अता फ़रमाए दर्जात बुलंद फ़रमाए और सभी मुताल्लिक़ीन को सब्रजमील अता फ़रमाए आमीन ।
मौत इस की है करे जिस का ज़माना अफसोस
नहमदा व नसली अली रसोलह उलक्रीम
मौलाना डाक्टर सय्यद इर्शादाहमद बुखारी
वाकिफ़ रमूज़ शरीअत व तरीक़त ,आबिद व ज़ाहिद व मुत्तक़ी,दायी इस्लाम,मसलक अहले सुन्नत के बे मिसाल तर्जुमान,फ़िक्र मुजद्दिद अल्फ़ सानी व फ़िक्र रज़ा के हामिल व मबलग़,इस्लाफ़ के इल्मी वरूहानी कारनामों के अमीन व पासबान,कसीर दीनी उदारों के बानी,हजारों मुरीदों के पीर कामिल, मेरे उस्ताज़ ग्रामी हज़रत अल्लामा मुफ्ती मुहम्मद आफ़ाक़ मुजद्दिदी नक़्शबंदी बरकाती मिलित इस्लामीया को अपनी दीनी व इल्मी ख़िदमात से मुअत्तर करते हुए आज बज़्म रफ़्तगाँ का एक हिस्सा बिन गए ।
हज़रत मुफ्ती आफ़ाक़ साहिब रहमत अल्लाह अलैहि के अज़ीम कारनामे ,आप के औसाफ़ व कमालात, दीनी व कौमी ख़िदमात हमेशा याद रखे जाएँ गे। आप की शख्सियत मुतहर्रिक अंजुमन थी, जो इल्म दीन को आम करने और मिलित इस्लामीया को उलूम नाफ़ा से मरबूत करने के लिए अनथक मेहनत और जिद वजहद करती रही । मुतअद्दिद उदारों के बानी,दर्जनों किताबों के मुसन्निफ़,खुश अक़ीदा मुसलमानों के मुख़लिस रह नुमा ,अमल सालिह के पीकर, इख़लास , उम्दा अख़लाक़ और संजीदगी विमतांत के मालिक , तोकल अली अल्लाह और ख़ुद्दारी के हामिल ,उस्ताज़ क्रीम मुफ्ती साहिब का पुरनूर,बारौनक और मुस्कराता हुआ चेहरा हमारे दिल व दिमाग में गर्दिश करता रहे गा । मुफ्ती साहिब की सादा ज़िन्दगी और इख़लास व इन्किसार ने मुसलमानों की एक बड़ी तादाद बल्कि अतराफ़ व जवानब के अहले वतन और सियासी रहनुमाओं को इतना मुतास्सिर किया कि आप की ज़ियारत व क़दम बोसी को सआदत समझते ।
राक़िम सुतूर को हज़रत से शरफ़ तिलमिज़ हासिल है, जब से उन की रहलत की खबर आई है मेरा पूरा वजूद ग़म में डूबा हुआ है,हज़रत की शफकत व इनायत और उन की नूरानी सूरत की यादें ख़त्म होने का नाम नहीं ले रही हैं ।मगर आह! अब वह हमारे दरमियान नहीं ।
राक़िम सुतूर अपने मुशफ़िक़ उस्ताज़ की रहलत पर निहायत सोगवार है और दुआगो है कि अल्लाह अज़्ज़ व जल्ल आप का नोम अलबदल अता फ़रमाए,आप के दर्जात बुलंद फ़रमाए, हमें,उन के मुरीदैन व मुताल्लिक़ीन और बिलख़सूस उन के अहले ख़ाना को सब्र जमील अता फ़रमाए । मौला ता ला उन की इल्मी तहरीक को मजबूती व तरक्की अता
आसमां उन की लहद पा शबनम अफ़्शानी करे
सब्ज़ नौरस्ता इस घर की निगहरानी करे
इस्लामिक रिसर्च सेंटर बंगला देश
माहिर उलूम इस्लामीया यादगार सल्फ
उलशेख़ मुहम्मद सलेम उलक़ादरी उलअज़ीमी
पेरो मुर्शद सय्याह यूरोप व एशिया व अफ्रीका हज़रत अल्लामा मुफ्ती ख़्वाजा सय्यद अज़ीम उद्दीन हादी अलजिलानी साहिब के ज़रिया मालूम हुआ हिंदोस्तान के खुशबूदार ज़िला क़न्नौज में
माहिर उलूम इस्लामीया यादगार सल्फ मौलाना मुफ्ती आफ़ाक़ अहमद मुजद्दिदी नक़्शबंदी साहिब का विसाल होगया है
अना लिल्लाह वाना इलिया राजावन
वारिस उलूम आला हज़रत हुज़ूर ताज अलशरीआ अल्लामा मुफ्ती अल्हाज उलशाह मुहम्मद अख्तर रज़ा ख़ान कादरी बरेलवी अलैहि अर्रहमा और शहजादा ग़ौस आज़म ख़लीफ़ा हुज़ूर मुफ़्तई आज़म हिंद सरकार नूरालावलिया महबूब रहमानी अल्लामा मुफ्ती अल्हाज उलशाह ख़्वाजा सय्यद नुरुद्दीन अलजिलानी अलबग़दादी अलैहि अर्रहमा के बाद हज़रत बह्रुल-इरफ़ान की रहलत ने मिलित इस्लामीया में ग़म का माहौल बनादिया है। ऐसी अज़ीम शख़्सियात के बाद उन की जगह पर करना बहुत मुश्किल काम है।
हज़रत मुफ्ती साहिब के नाम अपनी क़याम गाह पर कुरआन ख़वानी का एहतिमाम किया और रोज़ रसूल सिल्ली अल्लाह अलैहि वसल्लम पर दुआ की है।
अल्लाह तआला उन अकाबिर के फ़ैज़ व बरकात से हम सब को माला माल फ़रमाए। आमीन
मुकीम हाल मदीना मुनव्वरा सऊदीया अरबिया