अध्याय 36 में से 65पृष्ठ 249–258
बह्र उल-इरफ़ान एक वसीअ अलफ़कर आलम
मुफ्ती सय्यद ज़िया उद्दीन नक़्शबंदी*
बह्र उल-इरफ़ान हज़रत मौलाना मुफ्ती आफ़ाक़ अहमद मुजद्दिदी रहमत अल्लाह अलैहि एक वसीअ अलफ़कर आलम‘जलील अलक़द्र मबलग़‘साहिब तसनीफ़ बुजुर्ग, मुतअद्दिद कमालात इल्मी के जा मा थे ,आप ने इलजामाचालाहमदीत क़न्नौज और कई इस्लामी व असरी मदारिस क़ायम किए ,कौम व मिलित को दीनी व असरी तालीम के जेवर से आरास्ता वपारास्ता करने के लिए अपनी ज़िन्दगी को वक्फ करदिया था, इशाअत दीन ,दिफ़ा इस्लाम के सच्चे जज्बे से सरशार होकर जहद मुसलसल करते रहे हर तबका को इस के लिहाज से फ़ैज़याब किया अवामी इजतिमाआत में ख़ताबात मवाइज़ व रसाइल के ज़रिया आमईयालमुस्लिमीन की सलाह वफ़लाह के लिए ख़िदमात अंजाम दें , वाबस्तगान सिलसिला को इसलाह बा तन‘ तसफ़ीआ क़ल्ब के लिए अज़कार व औराद की तलक़ीन ओरमुराक़बा की ताकीद फ़रमाते जिस के लिए आप ने खानगाह मुजद्दिदय का क़याम अमल में लाया और सिलसिला मुजद्दिदय की तरवेज वा शाअत में अहम रोल अदा किया , कोई मिली मसला दरपेश होता तो फ़िक्र मंद होजाते और उलमा से राबिता करते , हज़रत , अहकर से भी जदीद फ़िक़ही मिसाइल में गुफ़्तगू फ़रमाते
थे, मसला को हल करने की ताबा इमकान कोशिश करते जो सूरत बनती इस के मुताबिक अवाम की रहनुमाई करते इस सिलसिला में हुक्काम से राबिता की ज़रूरत पेश आती तो इस से गुरेज न करते इसी वजह से हर पेचीदा मसला में और हर उलझन में आप अवाम का मर्जा बने होते थे ,अख़लाक़ हसना का बेहतरीन नमूना थे ,हर एक के साथ खुश अख़लाक़ी से मुलाक़ात करते और शीरीं कलामी से गुफ़्तगू करते, समाजी और इल्मी वक़ार के बावजूद मुनकसिर उलमिज़ाजी क़ायम रखते ,तबीअत में दर्शित रोई व शिद्दत पसंदी बिलकुल न थी, सादगी का नमूना‘ हमदर्दी व ग़मगुसारी की मिसाल थे, आम लोगों के दुख दर्द में शरीक रहते दूसरों कोनेकी की दावत देते, बुराइयों से मना करते,गुफ़्तार व किरदार के ग़ाज़ी, किसी भी अमल को पाबंदी वा सतक़ामत के साथ करते,आप की उम्र ज़्यादा थी लेकिन हौसला जवान था।
बह्र उल-इरफ़ान हज़रत मौलाना मुफ्ती आफ़ाक़ अहमद मुजद्दिदी रहमत अल्लाह अलैहि ने सिलसिला मुजद्दिदय की वसीअ पैमाना पर अज़ीम ख़िदमात अंजाम दें,माद्दियत ज़दा अफराद को तरीक़त का जाम पिलाया , बंदों को ख़ुदा से जोड़ने और ख़ुदा के हुक्म के मुताबिक ज़िक्र अलहि से बहरा वर करने की सई मकबूल की,लोगों के दलों को नूर मुहम्मदी सिल्ली अल्लाह अलैहि वाला वस्हिबा वसल्लम से मनोर और मार्फत व आशनाई से मामूर करने के लिए मुल्क की मुतअद्दिद रियासतों में खानक़ाहों की तामीर करवाई जिस में सैंकड़ों बल्कि हजारों क़ल्ब व ज़बान ज़िक्र ख़ुदावंदी में मशगूल हैं चुनांचे आप की जीर निगरानी क़न्नौज, बनारस, विशाखा पट्टनम, दिहली, चंदी गढ़ और मध्य प्रदेश में मुजद्दिदी खानक़ाहें काम करती रहीं और उन शा अल्लाह आप के मिशन के मुताबिक करती रहीं गी।
हज़रत बह्र उल-इरफ़ान रहमत अल्लाह अलैहि अपने दिल में अल्लाह ताली का ख़ौफ़ रखते थे ,आप की ज़िन्दगी ख़ौफ़ अलहि व ख़शीयत रब्बानी की आईना दार थी जिस का इज़हार आप के वाज़ व नसीहत और तकरीर व तहरीरसे होता है ,आप की शख्सियत का शुमार उन उल्मा में है जिन के बारे में फ़रमाया गया: उन्मायख़शी अल्लाह मिन इबादा अलालमा ।
जैसा कि ख़्वाजा मीर दर्द रहमत अल्लाह अलैहि ने फ़रमाया है:
दर्द दिल के वास्ता पैदा किया इंसान को
वर्ना ताअत के लिए कुछ कम न थे करू बयाँ
इसी दर्द दिल को ज़ाहिर करने के लिए और दूसरों में इस दर्द को मुंतक़िल करने के लिए शाहरी को ज़रिया बनाया हमद व नात, मुनाजात व मनक़बत और दीगर इक़साम सखुन में शेअर कहे।
ग़ुरबा व यतामी की इआनत, कमजोरों और ज़ईफों की मदद करना आ प कामर्गो ब अमल था,आप उसे सआदत व
नेक बुख़ती की अलामत जानते थे,गरीब लड़कियों की शादी मां बाप के लिए समाज में एक बोझ बिन चुकी है,जहेज़ विलेन दीन के रिवाज ने उसे निहायत ही बोझिल करदिया, आप ने इस की तरफ़ ख़ुसूसी तवज्जो फ़रमाई और गरीब लड़कियों की इजतिमाई शादियां आप की जीर सरपरस्ती होती रहीं।
आप ने इल्म का एहतिराम और अहले इल्म की तौक़ीर का बड़ा ख़याल रखा ,तलबा वाल्मा आप के पास किसी ग़रज से मुलाक़ात के लिए आते तो रुखसत करते वक़्त इल्म व अहले इल्म का इकराम करते हुए उन्हें तोहफ्त पेश करते।
कई उदारों की सरबराही व सरपरस्ती के बावजूद तदरीसी ख़िदमात बराबर जारी रखते ,सही बुखारी शरीफ़ का दर्स बड़े एहतिमाम से दिया करते , चंद साल क़ब्ल जामिआ निज़ामीया हैदराबाद तशरीफ़ लाये थे, हज़रत शैख़ उलइस्लाम इमाम मुहम्मद अनिवारुल्लाह फ़ारूक़ी बानी जामिआ निज़ामीया अलैहि अर्रहमा के मजार प्राणवार पर हाजिरी दी और हज़रत शीह इलजामआ दामत बरकाताम अलालिया से मुलाक़ात भी की ।मेरे दादा पीर हज़रत आरिफ बिल्लाह अबुलहसनात सय्यद अब्द अल्लाह शाह नक़्शबंदी मुजद्दिदी कादरी मुहद्दिस दक्कन रहमता अल्लाह अलैहि औरसीदी व मुर्शदी हज़रत अबुलबरकात सय्यद खलील अल्लाह शाह नक़्शबंदी मुजद्दिदी कादरी रहमता अल्लाह अलैहि शहजादा अकबरोजानशीन हज़रत मुहद्दिस दक्कन अलैहि रहिमा के मज़ारात पर अनिवार पर हाजिरी दी ।निस्बत नक़्शबंदिया के हवाले से अहमोरको जामिआ अहमदिया क़न्नौज के जीर एहतिमाम मुनाक़िद शुदनी सेमीनारस व कान्फ्रेंसों में मक़ाला व खिताब के लिए मदऊ किया चुनांचे कसरत मस्रुफ़ियात के बाइस अहकर शरीक सेमीनार न होसका लेकिन अपना मक़ाला इरसाल करदिया था हज़रत ने अपने इदारा के किसी उस्ताज़ से वह मक़ाला सेमीनार में पढ़वाया।सिद्दीक़ अकबर कान्फ्रेंस और शहीद आज़म कान्फ्रेंस में शिरकत व खिताब की सआदत हासिल की ।हज़र त ने अपने दौलत कदे पर मदऊ किया निहायत सादा घर,नशिस्त व बरख़ास्त तकल्लुफ़ से आरी ,तवाज़ा का नमूना, मुलाक़ात व गुफ़्तगूमें इल्मी ज़ौक़ और सादगी झलकती थी कि इस्लाफ़ की बे रिया ज़िन्दगी याद आजाए।
अल्लाह ताली हज़रत की मग़फ़िरत फ़रमाए और जन्नत अलफ़र्दूस नसीब फ़रमाए , दर्जात बुलंद से बुलंद तर फ़रमाए, ख़लफ़ व जानशीन साहिब व जुमला फ़र्रज़िंदान ,ख़ुलफ़ा व अहले ख़ानवादा और जमी वाबस्तगान को नक़्श क़दम पर चलने वाला बनाए,हज़रत की इल्मी यादगारों को तादूर शम्स व क़मर सरचश्मा फ़ैज़ बनाए रखे ।आमीन बजाह उन्नबी अलामीन सिल्ली अल्लाह अलैहि वाला वस्हिबा वसल्लम अजमईन
*शेख अल्फ़िक़ा जामिआ निज़ामीया हैदर आबाद
हुज़ूर बह्रुल-इरफ़ान अलैहि अलरहम वालरिज़्वान बहैसीयत दाफ़े बुला
मौलानागुलाम रब्बानी आफ़ाक़ी मुजद्दिदी
नहमदा विंसली अला रसोलह उलक्रीम वाला आला वस्हिबा अजमईन
बे शुमार तारीफ़ें अल्लाह रब अलाज़त के लिए और अनगिनत दुरूद व सलाम अल्लाह के महबूब सय्यद एल्मरसिलीन ख़ातिम उलंबीयन रहमत अललालमीन सिल्ली अल्ला तआला अलैहि वाला वसल्लम पर जिन के सदक़े में सारी कायनात को चेन विस्कोन नसीब हुआ बे इन्तहा रहमतें नाज़िल हूँ रसूल क्रीम अलैहि अस्सलात वालतसलैम के उन आली मंजिलत इमितियों के मज़ारात प्राणवार पर जिन को प्रवर दिगार आलम ने जमीन की मीखें बनाया जिन का वजूद मसाऊद उम्मत मुहम्मदिया अली साहिभा अस्सलवात वालतसलीमात के लिए मुश्किल कुशा दाफ़े बुला हाजित रवा बिन कर सब के काम आया। उन्हें मक़बूलान बारगाह एज़दी में से एक ज़ात वाला सिफ़ात हमारे सरकार मुर्शदी हुज़ूर बह्रुल-इरफ़ान रज़ि अल्लाह अन्हु की है जिन की शख्सियत मुहताज तआरुफ़ नहीं।
यों तो विसाल प्रमलाल के बाद दुनिया ने देखा जो देखा लेकिन जिस खुश नसीब इंसान ने हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान रज़ि अल्लाह तआला अन्हु से हयात ज़ाहिरी में एक बार मुलाक़ात का शरफ़ हासिल किया वह आज तक यही कहता नज़र आरहा है कि हज़रत जैसा आज तक मेरी निगाहों ने कहीं नहीं और कभी नहीं देखा।
हक़ीक़त भी यही है कि जिस मैदान में देखे चाहे इल्मी हो या अमली कौली हो या फ़ाली दीनी ख़िदमात हूँ या कौम व मिलित की फ़लाह वबहबूद की फ़िक्र या फिर लोगों के दुख दर्द में शिरकत हो या उनकी मुश्किल कुशाई हर एक में वह मुनफ़रद और अदीम उलमिसाल नज़र आते हैं चूंकि मेरा अनवान हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान बहैसीयत दाफ़े बुला है इस लिए में अपने मक़सद की तरफ़ आते हुए अपने चश्म दीद कुछ हक़ीक़ी वाक़ियात को कलमबंद कर के बात मुकम्मल करने की कोशिश करूँ गा।
(1)मुहम्मद आसिफ अमुर्दा क़न्नौज जो मेरा फू फू ज़ाद भाई है इस के लेवर के पास वाली आंत में कैंसर होगया था कानपुर वगैरह में डाक्टर ने मना करदिया जिस की उम्र 22 साल होगई धुली एमसमें दिखाया डाक्टर ने अप्रेशन को कहा ज़िंदा रहने की कोई उम्मीद नहीं थी दो माह से पहले खाना बंद करदिया था हालत बहुत नासाज़ थी।
जनाब मास्टर इकरार ख़ाँ आफ़ाक़ी ने हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान से अर्ज़ किया आप धुली तशरीफ़ ले गए आप ने जनाब आसिफ को अपने हाथ से कुछ चीजें खिलाएं और फ़रमाया खाओ यह भी खाओ यह भी खाओ और दा फ़रमाई अल्ला तआला ने हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान की दुआ के सदक़े बग़ैर आपरेशन के शिफ़ा अता फ़रमाई वह अब मुकम्मल ठीक है। यह वाक़ा 22 अगस्त 2018 का है।
(2) जनाब सय्यद नसीम जाफ़री आफ़ाक़ी चमन गंज कानपुर के घर ख़बीसों ने कब्जा करलिया था उन का बेटा इब्राहिम जिस की उम्र 16 साल /2018 की बात है इस पर हाजिर होजाते और पूरे घर वालों को परेशान करते कभी सामान फेंकते कभी कुर्सी उधर उधर करते लाखों रूपए बर्बाद करदिया। जब भी इब्राहिम नमाज़ के लिए वुज़ू करने बैठता इस को उठा कर दौर दौर फेंक देते।
मुख़तलिफ़ जगह दिखाया लेकिन कहीं आराम नहीं मिला किसी साहिब के बताने पर क़न्नौज तशरीफ़ लाये इत्तफाक़ कि हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान बाहर तशरीफ़ ले गए थे में फ़क़ीर आफ़ाक़ी ने कुछ तावीज़ दे कर दूसरे दिन उन के घर जाकर बुलंद आवाज़ से घर में कहा आप लोग यहाँ से चले जाओ अब हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान का काम शुरू होगया है।
अल्ला तआला ने आप के नाम में इतना रोब रखा था अगर यकीन के साथ पुकार कर दहाई दी जाए तो जिन्नात वहाँ से भाग जाते हैं जब हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान से यह वाक़ा बयान किया आप मुस्कुराए।
और सय्यद साहिब के अर्ज़ करने पर घर तशरीफ़ ले गए घर के सारे लोग हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान के हाथ पर बीअत होगएबीअत के बाद तीन ख़बीसों ने इब्राहिम पर हाजिर हो कर गलती की माफी माँगी और कलिमा पढ़ कर मुसलमान होगएजो उन का सरदार था वह कहने लगा अगर आप के पीर साहिब इतने बड़े वली न होते तो में इस लड़के को मार देता।
(3)जनाब मुहम्मद रियाज़ मुजद्दिदी बग़्य फजल इमाम क़न्नौज ने मुझ फ़क़ीर आफ़ाक़ी से ख़ुद बयान किया उन का लड़का अंसार जिस को पीलिया हो गया था पी लियाbilrubin 26जब होता है तो दिमाग तक पहुँच जाता है जिस से इंसान मरजाता है अंसार को पी लिया 32 था किसी दूसरे डाक्टर को दिखा ने कानपुर ले जा रहे थे जनाब रियाज़ मुजद्दिदी ने हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान को फोन किया आप ने फ़रमाया मुझे मालूम है तुम कहीं और न जाना डाक्टरAhuja के पास चले जाओ जब डाक्टर ने देखा तो बोला यह लड़का सड़क से पैदल चल कर आया है या गोद में जनाब रियाज़ साहिब कहते हैं पैदल चल कर आया है डाक्टर कहने लगा, या तो यह रिपोर्ट गलत है या इस पर बुजुर्गों का साया है 26
में तो लोग मर जाते हैं इस को तो 32 पीलिया है जनाब रियाज़ ने कहा हम बह्र उल-इरफ़ान के मुरीद हैं हज़रत ने दुआ की है और पीने को तावीज़ भी दिया है डाक्टर Ahuja ने लड़के कोAdmit करलिया और चार दिन तक कोई जवाब नहीं दिया हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान से डाक्टर फोन पर बराबर बात करता रहा आप फ़रमाते आप इलाज करू में दुआ करता हूँ।
रोजाना मुहम्मद रियाज़ अहमद हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान और मुजद्दिद अल्फ़ सानी को याद करते करते सौ जाते चौथे रोज़ ख्वाब में देखाचार लोग तशरीफ़ लाये हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान और उन के दाहिने जानिब मुजद्दिद अल्फ़ सानी दो लोगों को में पहचान न सिक्का हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान ने फ़रमाया आज तुम्हारा लड़का ठीक हो जाए गा जब डाक्टर आयाआऔर इस ने मुआइना किया तो इस ने कहा आप का लड़का खतरे से बाहर होगया है जनाब रियाज़ अहमद ने कहा मुझे मालूम है डाक्टर बोला आप को कैसे पता रियाज़ अहमद ने कहा बह्र उल-इरफ़ान आज रात मेरे ख्वाब में तशरीफ़ लाये और फ़रमाया तुम्हारा लड़का ठीक हो जाए गा।
(4)जनाब रियाज़ अहमद मुजद्दिदी नेही मुझ फ़क़ीर आफ़ाक़ी से बयान किया कि एक मर्तबा भड़ोंसा से क़न्नौज बारात से वापस आरहे थे जब ऐसी पुर पहूँचे हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान ने मौलाना तन्ज़ीफ़ अहमद साहिब से फ़रमाया मग़रिब की नमाज़ ऐसी पूरमें पढ़ ली जाए साथ में आठ या दस लोग थे सब ने कहा हुज़ूर अभी इतना वक़्त है हम लोग ख़ुदा गंज पहुँच सकते हैं आप ने फिर फ़रमाया नमाज़ यहीं पढ़ ली जाए फिर सब ने वही कहा फिर आप ने फ़रमाया नमाज़ यहीं पढ़ ली जाए तो सारे लोग वहीं नमाज़ के लिए रुक गए जैसे ही मस्जिद में वुज़ू बनाकर दाखिल हुए बहुत तेज तूफान आया और बारिश हुई तूफान की वजह से तमाम दरख्त सड़क पर गर गए।
बाद में हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान ने फ़रमाया अच्छा रहा नमाज़ यहीं पढ़ ली रास्ते में कुछ भी होसकता था। यह वाक़ा तक़रीबन 15 साल पहले का है।
(5)में फ़क़ीर आफ़ाक़ी ग़ालिबा 2016में रमजान उलमुबारक के पहले अशरे में चंदे के सिलसिला में धुली गया था मास्टर इकरार ख़ान आफ़ाक़ी ने हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान की दावत की आप ज़ाकिरनगर से हर्ष बिहार जनाब जमाल ख़ाँ आफ़ाक़ी की मोटर साइकल से तशरीफ़ लाये इशासे पहले जमाल ख़ान के घर से फोन आया अस्र के वक़्त लड़का घर से बाहर गया तलाश करने के बावजूद अभी तक कोई खबर नहीं है सब लोग बहुत परेशान हैं जब हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान से अर्ज़ किया आप दुआ फरमाएं आप ने मुझ फ़क़ीर आफ़ाक़ी से फ़रमाया
जमाल भाई से कह दो परेशान न हूँ तुम्हारा लड़का मस्जिद में स्वरहा है जब मस्जिद में देखा तो वाक़ई सौ रहा था अल्लाह तआला ने हुज़ूर बह्रुल-इरफ़ान को ऐसा कश्फ़ अता फ़रमाया था जिस की मिसाल मिलना नामुमकिन है।
(6)फ़क़ीर आफ़ाक़ी को हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान ने 2013 में कुछ गुजरात भेजा था एक ख़ातून पर ज़बर दस्त जिन था छ माह से कइ आमिल पीर वगैरह के देखने के बावजूद कोई फायदा नहीं हो रहा था।
हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान ने चलते वक़्त नसीहत फ़रमाई जब वहाँ पहुँच जाना जिन हाजिर हो तो इस को बता देना में क़न्नौज से आया हूँ, जब में वहाँ पहुँचा वह जिन हाजिर हुआ इतने जलाल में था मुझ से कहने लगा तुम को जिला कर खाक कर दों गा मार्दों गा ।में ने कहा मुझ को हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान अल्लामा मुफ्ती आफ़ाक़ अहमद मुजद्दिदी ने भेजा है जिन बोला कौन है मुफ्ती आफ़ाक़ अहमद मुजद्दिदी जब इस को बह्र उल-इरफ़ान की शिनाख्त कराई एक दम नार्मल पड़ गया लंबी सांस ली और चंद लम्हे खामोश रहा फ़क़ीर आफ़ाक़ी ने बहकम बह्र उल-इरफ़ान चंद तावीज़ और फिलेते दिए हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान ने ख़ातून के शौहर से फोन पर फ़रमाया परेशान न हो ठीक हो जाए गी थोड़े ही दिनों में हुज़ूर बह्रुल-इरफ़ान के तसर्फ़ नेइस ख़ातून को सुरक्ष जिन से छुटकारा अता फ़रमाया।
(7)मौलाना अहमद अली आफ़ाक़ी बड़हरिया सेवान ने मुझ फ़क़ीर आफ़ाक़ी से बयान किया हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान अपने ख़लीफ़ा और ख़ादिम ख़ास मौलाना आफताब आलम आफ़ाक़ी का निकाह पढ़ाने के बाद 9 फरवरी 2010 को मेरे घर पहली मर्तबा तशरीफ़ लाये मेरी छोटी बहन का लेवर खराब हो गया था बहुत बीमार थी जैसे ही हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान घर में दाखिल हुए बहन सामने खड़ी थी देखते ही फ़रमाया बेटी बीमार है किया? उन के वालिद ने कहा जी हुज़ूर, आप ने फ़रमाया ठीक है एक हफ्ते के बाद ख्वाब में हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान ने मिठाई दी फ़रमाया उसे खालू मिठाई खाने के बाद बग़ैर किसी इलाज के मुकम्मल सेहत याब होगई और आज तक ठीक है।
(8)मौलाना अहमद अली आफ़ाक़ी ने मुझ फ़क़ीर आफ़ाक़ी से बयान किया उनकी दूसरी बहन जो जामाज़ अलमहसनात में जीर तालीम थी अक्सर बेहोश हो जाती और सर में दर्द इतना रहता था कि सब लोग बहुत परेशान हो जाते ख़लीफ़ा बह्र उल-इरफ़ान अल्लामा आसिफ रज़ा साहिब क़िबला जो हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान के दामाद हैं वह भी बहुत परेशान थे जब हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान से अर्ज़ किया तो आप ने फ़रमाया अगर अब की मर्तबा बे होश हो जाए तो मेरे सामने लेकर आना आप का इतना फरमाना था कि इस के बाद कई साल हो गए आज तक न बे होश हुई और न कोई तकलीफ़ हुई।
(9)मुहम्मद जावेद बसंदरह ज़िला इटा पर एक ताकत वर जिन ने कब्जा करलिया था जब हाजिर होता आठ दस लोगों
को एक झटके में अलग कर देता मुख़तलिफ़ जगह दिखाने के बावजूद कोई फायदा नहीं हुआ जहां जहां देखा या तावीज़ करने वालों को इस ने मारा ही था मौलाना सलमान मैन पूरी के कहने पर में फ़क़ीर आफ़ाक़ी उन के घर गया जब वह जिन जावेद पर अपनी पूरी आब ताब के साथ हाजिर हुआ में ने फ़ौरन हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान को याद किया आप ने फ़ौरानमेरी मदद फ़रमाई इस ने क़ायदे से बात की घर वाले कहने लगे मौलाना साहिब पहले इंसान आप हैं जो इस ने हाथ नहीं उठाया वर्ना हर तावीज़ करने वाले को मारता है।
में ने उन से कहा आप जावेद को क़न्नौज हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान की बारगाह में लेकर आना चंद दिनों के बाद वह जावेद को लेकर हाजिर हुए हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान ने जिन को हाजिर किया और बात की जलाल में फ़रमाया आज ही इस को छोड़ ना पड़े गा बह्र उल-इरफ़ान का रोब और रूहानियत की ताकत ने सुरक्ष जिन को माफी मांगने पर मजबूर कर दिया और किस्म खाई अब परेशान नहीं करे गा जब से जावेद मुकम्मल ठीक है। यह वाक़ा 5 अगस्त 2018 का है।
(10)फ़क़ीर आफ़ाक़ी के बचपन ही से नाक से खून आता था बहुत इलाज किराया जिस ने जो कुछ बताया वह किया लेकिन आराम नहीं मिलता था कभी कभी आधा घंटा होजाता खून बंद नहीं होता बहुत परेशान रहता तक़रीबन 15 साल होगए कभी भी कहीं भी खून निकलने लगता एक मर्तबा में ने हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान से अर्ज़ किया नाक से खून आता है परेशान हूँ आप ने आमाल रज़ा किताब देते हुए फ़रमाया इस में तावीज़ है बना लो में ने किताब लेते हुए अपने दिल में सोचा हुज़ूर अपने हाथों से बनादें तो बेहतर रहे गा और किताब रख दी कुछ देर के बाद हुज़ूर ने दुबारा किताब देते हुए फ़रमाया तावीज़ बनालो में ने अर्ज़ की हुज़ूर तावीज़ नहीं बांधों गा आप सिर्फ़ निगाह कर्म करदें इतना अर्ज़ किया आप ने निगाह उठाई में काँप सा गया फिर निगाह नीची करली आप की एक निगाह कर्म हुई मेरा काम हो गया अल्लाह ने शिफ़ा दे दी बहमदा तआला इस के बाद नाक से खून नहीं आया।
(11)जनाब मास्टर रईस उलहसन रौरा ज़िला क़न्नौज ने मुझ फ़क़ीर आफ़ाक़ी से बयान किया कि में ने हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान को अपने वालिद जनाब शब्बीर ख़ाँ की फ़ातिहा चहलुम के मौका पर 1 जून 1994 में बुलाया दोपहर का वक़्त था मास्टर साहिब के दूसरे घर में आग लग गई जिस की लपटें दो तीन मंज़िल तक उठ रही थीं मास्टर साहिब और लोगों के घर में राई की लकड़ी वगैरह जमा थी हुआ भी बहुत तेज थी आग की लपटें इतनी तेज थीं
के पूरा गाओं आग की लपेट में आसकता थाहजूर बह्र उल-इरफ़ान ने फ़ौरन कुछ कंकर पढ़ कर आग में डाले आग की लपटें सीधी उपर को जाने लगीं जितने हिस्से में आग लगी थी वहीं पर जल कर ख़त्म होगई वर्ना पूरा गाओं खतरे में था हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान के तसर्फ़ ने पूरे गाओं को बहुत बड़े हादसे से बचालिया।
(12)जनाब क़ारी दीन मुहम्मद उर्फ इमामी साहिब ने मुझ फ़क़ीर आफ़ाक़ी से बयान किया जनाब आक़िल ख़ान मुंबई वाले उन के सर में टोमर होगया था हालत इतनी खराब होगई सिर्फ़ पांच पर्सेंट बचने की उम्मीद थी उन को जनाब शाकिर ख़ान जो जनाब शाहिद साहिब पाटा नाला क़न्नौज के भाई हैं उन्हों ने कहा आप हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान के पास चलू दुआ कराते हैं क़न्नौज तशरीफ़ लाये हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान से मुलाक़ात की आप ने दा फ़रमाई अल्लाह ताला ने आप की दुआ से ख़ान साहिब को शिफ़ा अता फ़रमाई आज भी वह ठीक हैं यह वाक़ा ग़ालिबन 2009 का है।
(13)उन्हें दीन मुहम्मद उर्फ इमामी साहिब ने मुझ फ़क़ीर आफ़ाक़ी से बयान किया कि जनाब वली ख़ान साहिब क़ायम गंज रो रो कर बता रहे थे कि में इतना बीमार हो गया कई महीनों से में ने खाना नहीं खाया था बदन में इतनी ताकत नहीं कि दस मिनट भी बैठ सकों दा के लिए हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान की बारगाह में हाजिर हुआ हज़रत ने मेहमानों के लिए कोल्ड्रिंक मंगाई सब को दी गई ख़ादिम ने मुझे भी दी ख़ान साहिब कहने लगे में ने कई महीनों सेखाना नहीं खाया है में नहीं पियों गा किसी ने कहा बह्र उल-इरफ़ान का तबरक है थोडी पी लो ख़ान साहिब कहते हैं जैसे में ने एक घोंट पी ऐसा लगा जैसे आग पर पानी डाल दिया हो बहुत आराम मिल गया में ने ख़ादिम से कहा किया और मिल सकती है ख़ादिम ने एक ग्लास भर कर दी में ने सब पी ली हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान का ऐसा कर्म हुआ में लेट कर आया था चल कर घर गया।
(14)हाजी उन्नीस साहिब लतीफ़ी डीनगर पुर ज़िला मुराद आबाद ने मुझ फ़क़ीर आफ़ाक़ी से बयान किया उन के साड़ू के सर में दर्द रहता था बहुत परेशान थे इलाज करवाने के बावजूद कोई फायदा नहीं होता था हाजी उन्नीस साहिब ने हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान से अर्ज़ किया आप ने सिर्फ़ पानी पर दम किया इसी वक़्त से आज तक दर्द नहीं हुआ यह वाक़ा 2007 का है।
(15)उन्हें हाजी उन्नीस साहिब ने मुझ फ़क़ीर आफ़ाक़ी से बयान किया कि में और जनाब असलम साहिब और बड़े दामाद अब्द अलरूफ़ मुरादाबाद से क़न्नौज 2007 में हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान से मुलाक़ात के लिए चले जनाब असलम साहिब को एलर्जी थी जब भी चाय पीते पूरे बदन में छाले से पड़ जाते जब गाड़ी फ़र्ख़ आबाद पहुँची
में ने चाय पी और असलम भाई को भी प्लादी चाय पीते ही असलम भाई के बदन में छाले से पड़ गए।
बहुत परेशान हुए जब सुबह क़न्नौज पहूँचे हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान की आदत करीमा थी कोई भी मेहमान आता तो चाय नाश्ता जरूर कराते आप ने पौड़ी सब्जी मंगा कर नाश्ता किराया और बाद में चाय दी हाजी उन्नीस साहिब ने अर्ज़ किया हुज़ूर असलम भाई चाय पीते हैं तो बदन में छाले से पड़जाते हैं हुज़ूर ने फ़रमाया ग्लास में पानी दो कुछ दम किया और पीने को कहा असलम भाई कहते हैं जब से लेकर आज तक अगर पेट भर कर भी चाय पी लो तो कोई तकलीफ़ नहीं होती।
यह चंद वाक़ियात में ने हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान के ताल्लुक से कलमबंद किए इस तरह के बे शुमार वाक़ियात हैं जो हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान की दा और तसर्फ़ से लोगों की बिगड़ी बनी अल्लाह हमें बह्र उल-इरफ़ान के मिशन को आगे बढ़ाने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए आप की सच्ची मुहब्बत अता फ़रमाए आप के फ़ैज़ान से माला माल फ़रमाए।