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Allama Afaque Ahmad Mujaddidiबह्र उल-इरफ़ान: समात व जहातहुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान औराहीए तसव्वुफ़ व तजदीद तरीक़त

अध्याय 62 में से 65पृष्ठ 413–431

हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान औराहीए तसव्वुफ़ व तजदीद तरीक़त

मौलाना आफताब आलम आफ़ाक़ी

अलहम्द लिल्लाह व अलसलो वस्सलाम अली सय्यद अलानबया व एल्मरसिलीन वाली इला वस्हिबा अजमईन ।

तीन सौ साल से हैं हिंद के मे ख़ाने बंद

अब ज़रूरत है तेरा फ़ैज़ हो आम ए साकी

अल्लाह के कुछ चुनिंदा बंदे ऐसे होते हैं जिन्हें वह बड़े कामों के लिए दुनिया में भेजताहै उन की तरबीयत अल्लाह तआला अपने जिम्मा कर्म पर ले लेता है वह अल्लाह के महबूब और मुराद बंदे कहलाते हैं लेकिन उन्हें भी मुर्शद कामिल की ज़रूरत हो ती है ताकि इस के ज़रिया फतेह बाब हो सके और वह बड़े फ़्यूज़ात केलायक बिन सके फिर उसकी रूहानी तरक़्क़ीयात और उरूजात अनोखे और निराले होते हैं इसी लिएहजूर बह्र उल-इरफ़ान क़ुद्दिस सरह तालीम से फ़राग़त के बाद रूहानियत की तलाश में रहते थे और असातिज़ा से मुर्शद कामिल के ताल्लुक से पूछते रहते थे, आप चाहते थे कि ऐसा मुर्शद मिले जो ख़ुद भी वासल बारगाह सुबहान हो और दूसरों को भी वासल कराता हो। अल्लाह मुसबब अलासबाब है जो लोग इस की राह तलाश करते हैं उन्हें वह अपनी राह जरूर दिखाता है , हुज़ूर आरिफ बिल्लाह मौलाना अहमद रज़ा ख़ान बनारसी दाम ज़ला अलाली से मुलाक़ात हुई , दिल तो पहले ही से उनकी विलायत पर मुतमइन था , लेकिन मुलाक़ात के बाद ख़याल आया कि कोई करामत देखने को मिल जाती तो दिल और मुतमइन होजाता , साथ में बैठे एक मौलाना को हज़रत के मुर्शद ने हुक्म दिया कि अलमारी से फलां किताब निकाल कर लाइव , कुछ औराक़ पलटे और हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान से फ़रमाया मौलानाइस को पढ़िए , जब पढ़ातो लिखा था कि मुर्शद से करामत नहीं तलब करनी चाहिए , आका अलैहि अस्सलाम से मोजज़ात कुफ़्फ़ार तलब करते थे, हुज़ूर बह्रुल-इरफ़ान का दिल बहुत खुश हुआ कि करामत भी दिखा दी और किसी को पता भी नहीं चला ।

हुज़ूर बह्रुल-इरफ़ान अलैहि अर्रहमा अपने मुर्शिदाली वक़ार दाम ज़ला अलाली की बारगाह में रह कर तीन या चार साल तक बराबर तवज्ज्हात हासिल करते रहे ,ओर्सलोक नक़्शबंदिया मुजद्दिदय को तै करते रहे , इस के बाद मुर्शद ने हुक्म दिया कि अब तुम को हमारी सोहबत की ज़रूरत नहीं है , जाइव और इरशाद व हिदायत का काम करू ।

मुर्शद ग्रामी से इजाजत व खिलाफत के बाद क़न्नौज की सरजमीं को अपने पाक कदमों से शरफ़ बख्शा ,और

शहर के मुहल्ला अहमद नगर हमाली पूरा क़न्नौज में अल-जामिआ अल-अहमदिया अस्सुन्निया का क़याम फ़रमाया औरअपनी इल्मी व रूहानी सरगर्मियों का मरकज़ बनाया इस मुहल्ला की एक छोटी सी मस्जिद (जोकि बाद में मस्जिद नक़्शबंद याहज़रत वाली मस्जिद के नाम से मशहूर हुई )में अपनी पूरी हयात तैबा ज़िक्र विमराक़िबात व इबादात किए,और इसी मस्जिद के एक छोटे से हुजरे में सुकूनत इख्तियार करली ।

इसी मस्जिद के हवाले से एक अहम वाक़ा जो कि आप के दौर हयात में मशहूर था । इस के मुताल्लिक़ मरहूम मुहम्मद सादिक साहिब सेजो कि मस्जिद के पड़ोसी थे में ने दरयाफ्त कियाकि आप के हवालेसे में ने सुना है कि आप ने एक बार हज़रत को रात के वक़्त मस्जिद में देखा कि हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान का हर उज़ू अलग अलग हो कर अल्लाह अल्लाह कर रहा है उन्हों ने तस्दीक की और कहा कि हम यह देख कर डर गए , और मस्जिद से बाहर आगये , थोडी देर बाद हज़रत मस्जिद से बाहर निकले और मुझ से फ़रमाया कि जो देखा है इस को कहीं ज़िक्र न करना , और इसी वाक़े को मेरे साथी हज़रत मौलाना अब्द उलअज़ीज़ साहिब ने भी उन से दरयाफ्त किया तो उन ने से बताया कि में समझा थाकि किसी ने हज़रत वालाकोकॉट कर डाल दिया है।

इबतिदाई दौर का एक और चश्म दीद वाक़ा मौलाना जफर सेवानी ने बयान किया कि कशी नगर के मौज़ा शेख्वापट्टी की मस्जिद में रात के वक़्त तक़रीबा 11 बजे हूँ गे दाखिल हुआ देखा कि हज़रत चित्त लेते हैं और दिल खूब तेज धड़क रहा है और अल्लाह अल्लाह की आवाज़ आरही है बग़ैर कुछ बोले बाहर निकल गया बाहर देखा कि मस्जिद के अतराफ़ में जो दरख्त हैं वह भी हल रहे हैं और उन से अल्लाह अल्लाह की आवाज़ आरही है जिसको में नेअपने कानों से सुना है।

मस्जिद नक़्शबंद में हलक़ा ज़िक्र व मुराक़बा जारी रहता था आप का मामूल था बाद फ़ज्र ता अशराक़ मुराक़बा फ़रमाते औरमुरीदैन व तालिबेन पर हसब मुरातिब तवज्ज्हात डालते फ़ातिहा विषजरा ख़वानी और दुआपुर हलक़ा का इख़तताम होता।नमाज़ अशराक़ व चाश्त से फ़ारिग़ हो कर दलायल अलख़ैरात का वरदावर कुरआन की तिलावत से फ़ारिग़ हो कर वक़्त पर मदरसे आजाते।जामिआ से फ़राग़त के बाद ज़ुहर की नमाज़ अदा फरमातेऔर मुराक़बा फ़रमाते,अस्र ता मग़रिब और बाद इशा भी मुराक़बा फ़रमाते मुराक़बे के बाद ख़ुलफ़ा व असातिज़ा जामिआ के साथ कौम व मिलित के मिसाइल पर गौर वफ़कर फ़रमाते और हफ्ते में एक दिन दर्स तसव्वुफ़ देते जिस में तसो फ़ की अहमियत वाफ़ादीयत और ज़रूरत पर रोशनी डालतेजस में अवाम वख़वास अहले ज़िक्र शामिल रहते और कभी ख़वास अहले ज़िक्र के सामने रमूज़ व इसरार अलहिह और मआरिफ़ मुजद्दिद व मुक़ामात सुलूक बयान फ़रमाते । जैसा कि हज़रत मुजद्दिद अल्फ़ सानी क़ुद्दिस सिर्रहू का तरीका था।

आप की बारगाह में तालिबान हक़ का एक हुजूम होने लगा और देखते देखते इतना हुजूम बढ़ा कि मस्जिद नक़्शबंद तंग पड़ने लगी हलक़ा ज़िक्र व मुराक़बा में अक्सर मदरसेन जामिआ और कसीर तादाद में तलबा और दौर दराज़ इलाकों से उलमाव मुरीदैन व सालकेन अवरशहर क़न्नौज के लोग भी अख़ज़ फ़ैज़ के लिए हाजिर होते।

यह हुजूम ख़ास तौर पर बाद फ़ज्र और इशा में होता और बाज़ लोग चारों वक़्त हाजिर होते अक्सर इशा के बाद मुराक़बा से फ़ारिग़ हो कृतसूफ़ के नकात बयान फ़रमाते। अमराज़ कलबेह रिज़ाइल नफ़्स और मुक़ामात अशरा जो सुलूक के लाजिमी जुज़ हैं तफ़सील से बयान करते ज़ात व सिफ़ात अलहिह वगैरह को समझाते असबाब क़ुर्ब अलहि और मवाने क़ुर्ब बताते ज़ाकिरेन का हाल दरयाफ्त करतेजस की तरक्की हो जाती आगे का सबक बढ़ाते ज़ाकिरेन की तारीफ़ करते कि फलां का ज़िक्र अच्छा चल रहा है,उन का क़ल्ब खूब नूर कबूल कर रहा है ,किसी से फ़रमाते कि उनकी कैफियत अच्छी है ,अक्सर जब सफर से लौटते तो बाहर के ज़ाकिरेन का तज़किरा करते कि फलां फलां इलाक़ा में कसरत से जाकिर बंदे तैयार हो गए हैं ।

जिन ज़ाकिरेन को कैफियत ज़िक्रमहसूस नहीं होती तौफ़रमाते कि फलां वक़्त में तुम मेरे सामने बैठना, चंद तवज्ज्हात में कैफियत महसूस होने लगती ,और कभी सफर पर रवाना होते तो फ़रमाते कि ऐसे ही पाबंदी के साथ ज़िक्रकर्ते रहना और हलक़ा बना कर बैठना क्योंकि अ स का फायदा यह है कि एक का ज़िक्र भी बारगाह अलहि में कबूल हो गया तो सब का कबूल हो जाता है।

हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान क़ुद्दिस सिर्रहू के मुरीदों में कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन के बारे में इरशाद फ़रमाते कि तुम लोग अब इस लायक हो गए हो कि दूसरों पर तवज्जो डाल सकते हो तरीका भी बताते कभी मुईन भाई को मुतवज्जा कर के फ़रमाते कि यह लोग हया करते हैं, माशा अल्लाह! मेरी टीम बहुत जबरदस्त तैयार हो गई है, अब हमें ज़्यादा फ़िक्र नहीं रहती है, काम करने वाले दो चार ही बहुत होते हैं, तुम लोग तो काफ़ी कसीर तादाद में हो, फ़क़ीर से कहते कि मुबतदी ज़ाकिरेन के नाम लिख लो और उन्हें पांच पांच करके तकसीम कर्दो ।फलां के पास पांच फलां के पास पांच। ताकि तवज्जो डालने की मश्क़ हो और तरीक़त में पुख्तगी पैदा हो।

हिंदोस्तान के अलावा बैरून मुल्क जो लोग ज़क्रोमराक़बा करते उन पर भी ग़ायबाना तवज्जो डालते जब लोगों के फोन आते तब पता चलता कि एक जगह बैठ कर कितनी जगहों पर आप का फ़ैज़ जारी है। लंदन, पाकिस्तान , बंगला देश,नेपाल, दुबई अरब अमारात ,अमेरीका सऊदी अरब ओरचीन वगैरह जैसे मुमालिक में कसीर लोग

मुराक़बात करते और हज़रत की तवज्ज्हात हासिल करते और उनका सुलूक तै कराते।

हिंदोस्तान के अक्सर सूबों में ज़ाकिरेन हैं कोई जम्मू से कोई राजस्थान से कोई मध्य प्रदेश से कोई बम्बइ से कोई सरहिंद शरीफ़ से पोपी बिहार के मुख़तलिफ़ इलाकों और शहरों से ताल्लुक रखने वाले अफराद पर तवज्जो डालते और वक़्त भी बताते कि तुम पर फलां वक़्त तवज्जो देता हूँ तुम को फलां वक़्त तवज्जो देता हूँ और ज़ाकिरेन भी ज़िक्र की कैफियत महसूस करते ।हम लोग सन कर ताजब करतेकि हज़रत एक वक़्त में कितने लोगों पर तवज्जो डालते हैं।

इस के अलावा वह मुरीदैन जो ज़िक्र वफ़कर वाले इस दार फ़ानी से जाचुके हैं उन की अर्वाह पर भी तवज्जो डालते और कभी नाम ले कर फ़रमाते कि फलां फलां भी हमारे हलक़े में आते हैं और ज़िक्र करते हैं इनमें मरहूम फरीद मुड़हर पुर कन्नौजी और मौलवी शब्बीर मुजद्दिदी मरहूम कानपुरी औरअपनेवालिद मुहतरम (अल्हाज क़याम उद्दीन अलैहि अर्रहमा) का ज़िक्र करतेऔर फ़रमाते यह लोग अक्सर सुबह के हलक़ा में हाजिर होते हैं और अखद फ़ैज़ करते हैं। मज़ेदफ़रमाते कि मुर्दों पर तवज्जो तेज असर करती है चूंकि रूह जिसम से अलग हो ती है।

ज़ाकिरेन फोन पर अपनी कैफियात बयान करते हसब लियाकत इन्कासबक आगे बढ़ा देते बाज़ ऐसे भी ज़ाकिरेन हैं जो क़न्नौज कभी आये भी नहीं सफर में ही कुछ सोहबत उठाई मुख़्तसर सोहबत और मुलाक़ात में ही फ़ैज़याब हुएऔर आज वह काफ़ी तरक्की पर हैं ।

आप अक्सरफ़रमाते कि हमारे सिलसिले में महरूमी नहीं है बस मुहब्बत शर्त है और अगर मुहब्बत और सोहबत दोनों जमा हो जाएँ तो हज़रत मुजद्दिद अल्फ़ सानी रज़ि अल्लाह अन्हु के बकौल यह सुर्ख सोना है और फ़रमाते कि क़ाज़ी सना अल्लाह पानी पत्ति क़ुद्दिस सिर्रहू ने फ़रमाया है कि मुर्दा के जिसम से निकली हुई रूह वापस कर देना यह इतनी बड़ी करामत नहीं जितनी बड़ी करामत मुर्दा दिल को ज़िंदा करना है।

मुर्दा क़ुलूब को जाकिर बनानाबहुत मुश्किल काम है इस में बहुत बड़े तसर्फ़ की ज़रूरत होती है और फ़रमाया कि जिस इंसान का दिल जाकिर हो जाताहै मरने के बाद इस की कब्र रोशन हो जाती है अगर दुनिया में उसको विलायत की दौलत नसीब नहीं हुई तो मरने के बाद विलायत का दर्जा मिल जाताहै ।

अब में उन मुक़ामात में से चंद का ज़िक्र कर रहा हूँ जहां हुज़ूर क़िबला तशरीफ़ ले जाते और हलक़ा ज़िक्र लगता मुराक़बात अ व रुदुरूस तसव्वुफ़ की मजालिस मुनाक़िद होतीं।

राज नगर (राजस्थान )हाजी अख्तर के घर भीलवाड़ा शरीफ़ भाई के घर उदयपुर मस्तान बाबा के मजार पर और हाजी अयूब साहिब के घर उदय पुर राजस्थान ,उम्र आफ़ाक़ी के घर शहर चित्तौड़गढ़ में और याकूब आफ़ाक़ी के घर निम्बाहेड़ा चित्तौड़ गढ़ में ज़िला जलगावं मस्जिद जापान जैन कस्बा अमिलनेर महाराष्ट्र में इस मस्जिद में काफ़ी बड़ा हलक़ा होता मौलाना मसाऊद आफ़ाक़ी जो कि इस मस्जिद के पेश इमाम थे उन केसाथ वहाँ बड़ी तादाद में नौजवान शरीक होते इसी से क़रीब एक गाओं बटावद ज़िला धूल्य में भी हलक़ा होता । और कस्बा रसोड़ ज़िला वाशिम महाराष्ट्र अरूस अलबलाद मुंबई में मौलाना इरफान आफ़ाक़ी की मस्जिद यानी कादरी मस्जिद नायक नगर साइन और उसके अलावा मुंबई के मुतअद्दिद मुक़ामात पर मुराक़बा और हलक़ा ज़िक्र होता ।मुल्क की राजधानी दिहली में जनाब ज़ाहिद ख़ान साहिब और अक्सरजनाब मुश्ताक साहिब और हाफ़िज़ अब्द अलरहमान के घर पर और रघुबीर नगर में जनाब आबिद ख़ान साहिब के घर पर पटपड़गंज आजाद अपार्टमेंट धुली में तौहीद अलरहमन लतीफ़ी के घर पर काफ़ी मुराक़बात किए।

और इस के अलावा जोधपुर में गुलाम रसूल भाई और इमतियाज़भाई के घर , नागौर में हज़रत सोफी हमीद उद्दीन चिश्ती नागौरी रहमत अल्लाह अलैहि के मजार प्राणवार पर , याफर अल्लामा उबीद अल्लाह हैदरी नक़्शबंदी साहिब के घर पर , दमोह एम पी में जनाब हाजी मुहम्मद यूनुस साहिब (पटेल बेड़ी वाले )और जनाब शकील आफ़ाक़ी साहिब और कभी मौलाना अब्द उलहफ़ीज़ आफ़ाक़ी के घर पर ,कटनी एम पी में मरहूम हाजी मुहम्मद इकबाल साहिब के घर और खानगाह बनने के बाद खानगाह मुजद्दिदय जमातीय में ,विशाखापट्टनम ,आंध्रा प्रदेश में जनाब हाजी बरकत अली आफ़ाक़ी साहिब के घर पर, और हैदर आबाद दक्कन, तलंगाना जनाब हाफ़िज़ मुहम्मद राशिद आफ़ाक़ी साहिब के घर ,या दरगाह यूसुफ़ेन में , और ज़िला महबूब नगर तलंगाना, मौज़ा पगड़ी मारी की मस्जिद में , याकभी मौलाना जहांगीर आफ़ाक़ी साहिब के घर पर, और ज़िला मुराद आबाद के मौज़ा डीनगर पुर में जनाब हाजी मुहम्मद उन्नीस साहिब लतीफ़ी , कभी सालम भाई आफ़ाक़ी , कभी मुहम्मद आमिर आफ़ाक़ी ,(हबीबी ट्रांसपोर्ट ) वग़ैरहम के घरों में ,और मौज़ा डोम घर में मुहम्मद सुहेल आफ़ाक़ी साहिब के घर पर और कभी कंदरकी लाइन पार की मस्जिद में , और कभी रफ़ीक भाई आफ़ाक़ी साहिब के घर पर , औरज़िला बदायूं के मौज़ा पिपलिया में जनाब मौलाना मुशाहिद रज़ा आफ़ाक़ी साहिब के घर पर और कभी इसी गावं की मस्जिद में , और ज़िला अमरोह के मौज़ा पिपलवती खुर्द में मौलाना क़ारी मुहम्मद ज़िया अलक़मर आफ़ाक़ी साहिब के घर पर , अव र मौज़ा हरियाणा में मुरीदैन और फ़ारग़ीन जामिआ अहमदिया के घरों में , और मौज़ा जहतोली में जनाब मौलाना मुहम्मद इमरान आफ़ाक़ी साहिब , क़ारी महफूज़ , दीन मुहम्मद इमामी साहिब के घरों पर हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान साहिब क़िबला अलैहि अलरहम व इलरिज़्वान ने हलक़ा ज़िक्र

फ़रमाया है और फ़क़ीर आफ़ाक़ी के घर मौज़ा बसंत पुर ज़िला देवरिया में उर्स कुतुब इलाक़ताब हज़रत मौलाना सय्यद अबुअलख़ैरात सेवानी अलैहि अलरहम व इलरिज़्वान के मौका पर हलक़ा ज़िक्र बरपा होतानीज़ आला हज़रत इमाम अहले सुन्नत अलैहि अलरहम व इलरिज़्वान के क़ुल शरीफ़ की महफ़िल मुनाक़िद होती जिस के अनिवार व तजल्लियात बयान से बाहर हैं। और शहर सेवान (बिहार )में अक्सर कुतुब इलाक़ताब मौलाना सय्यद अबू अलख़ैरात सेवानी नक़्शबंदी मुजद्दिदी क़ुद्दिस सरह के मजार पर अनिवार पर अतनाबड़ा हलक़ा लगता कि मंज़र देखने के लायक होता । उन में से बेशतर जगहें वह हैं जहां आप ने लायक अफराद को अमीर हलक़ा मुक़रर कर दिया और वहाँ मुस्तक़िल हलक़ा ज़िक्र व मुराक़बा होता है।

हक़ीक़त यह है कि जो बयान किया गया निहायत इजमाल है वर्ना ज़िला मुराद आबाद , अमरोह , संभल और बदायूं, के अतराफ़ व अकनाफ़ में जितनी जगहों पर हलक़ा ज़िक्र होता और तालिबेन दौर दौर से हलक़ा में शरीक होने के लिए जमा होते थे वह शुमार से बाहर है ।

और हुज़ूर बह्र उलारफा न अलैहि अर्रहमा हलक़ा ज़िक्र से फ़ारिग़ होने के बाद हर जगह कुछ न कुछ तसव्वुफ़ व रूहानियत की तालीम फ़रमाया करते थे । और मज़कूरा इलाकों के बारे में हुज़ूर क़िबला अलैहि अर्रहमा अक्सर फ़रमाया करते थे कि जब यहाँ आता हूँ तो बहुत अच्छा लगता है, यहाँ से सरहिंद शरीफ़ क़रीब है , हज़रत मुजद्दिद क़ुद्दिस सरह की याद आनेलगती है और उनका फ़ैज़ भी इस इलाक़ा में महसूस करता हूँ ,नीज़ यह भी फ़रमाया करते थे कि यह हमारे बुजुर्गों का इलाक़ा रहा है ।

हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान अलैहि अलरहम वालरिज़्वान की यह भी अनोखी शान नज़र आती थी कि आप के हलक़ा ज़िक्र व मुराक़बा में अवाम से ज़्यादा उलमा , हुफ़्फ़ाज़ और अइम्मा हज़रात शामिल होते थे।

क़न्नौज में सालाना आलमी कान्फ़र्स केमो क़ा पर मुल्क और बैरून मुल्क और हिंदोस्तान के मुख़तलिफ़ सूबों अवरशहरों से इस कसरत से ज़ाकिरेन हाजिर होते कि मस्जिद नक़्शबंद तंग पड़ जाती तो तैबा मस्जिद में हलक़ा फरमातेआप अहले ज़िक्र प्रतिवजहात डालते और इस मौका पर कुछ देर मुख़तलिफ़ नशिस्तों में बाहर से आये हुए मुरीदैन की तरबीयत फरमातेऔर जो ज़िक्र में तरक्की याफताह होते उनका सबक बढ़ा देते ।

अब हम उन लोगों का ज़िक्र करते हैं जिनके क़ुलूब एक ही मजलिस में या दूसरे दिन जाकिर हो गए या तालिब या मुरीद होने से पहले ही हलक़ा में बैठने से क़ल्ब में हरकत शुरू हो गइ बसा औकात हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान की तवज्जो इतनी पर तासीर होती कि जिन पर तवज्जो डाली तो मग़्लूब हो गए और कसरत नूर की वजह से जमीन पर लेट गए।

काफ़ी देर बाद अपनी असल हालत पर आये इस से हुज़ूर बह्र उलारफा न के तसर्फ़ बातिनी का पता चलता है।

हाफ़िज़ इसहाक़ साहिब संभली मुकीम राजस्थान जिनके लताइफ़ पर इंगुली रख कर हरम काबा में जाकिर कर दिए थे। मौलवी साबर साहिब झांसी प्रमसजिद नक़्शबंद में तवज्जो डाली तो बे होश हो गए फिर कुछ पढ़ कर दम किया तो होश में आये काफ़ी देर तक ऐसी कैफियत में रहे और ज़िक्र का ऐसा ग़लबा हुआ कि बैठ नहीं पा रहे थेहज़रत ने फ़रमाया कि उन्हें लिट्टा दो इस मंज़र को बहुत से लोगों ने देखा फ़क़ीर भी मौजूद था ।क़ारी आज़म साहिब के गाओं मौज़ा गर्दन पाई ज़िला राजौरी जम्मू अवकश्मीर में मौलाना यूनुस अत्तारी पर तवज्जो डाली फ़ैज़ का इस क़द्र ग़लबा हुआ कि मौलाना मछली की तरह तड़पने लगे क़रीब था कि बे होश हो जाते हज़रत ने फ़रमाया उन को हम सेजदा कर दो वर्ना यह कैफियत दौर नहीं होगी अलग करने के बाद भी मज़कूरा कैफियत बरकरार थी उधर शाम हो रही थी मौलाना को घर भी जाना था इस लिए आप ने उन्हें क़रीब बुलाया और फिर तवज्जो डाली फर्मौलाना असली हालत पर आगये। हज़रत ने फ़रमाया कि आज पहली बार फ़ैज़ को वापस खींचा है मौलाना ने अर्ज़ किया कि हुज़ूर हम को इसी कैफियत में रहने देते और में याद अलहि में तड़प तड़प कर मर जाता यही मौलाना हैं कि उन्हों ने हज़रत से अर्ज़ किया कि हम को तीनों सिलसिला में खिलाफत हासिल है आप सिलसिला नक़्शबंदिया की अता कर दें हज़रत ने फ़रमाया हम ऐसे खिलाफत नहीं बांटते फ़रमाया ज़िक्र करू । चंद दिनों के बाद फोन आया क़ल्ब जाकिर हो गया हालाँकि इस वक़्त तक मौलाना तालिब नहीं हुए थे । कई लोगों ने अर्ज़ किया कि हुज़ूर क़ल्ब पर इंगुली रख कर जाकिर करदें फ़रमाया पाबंदी से ज़िक्र करू तवज्जो काफ़ी है।

हाफ़िज़ जावेद उर्फ परवाना जम्मू कश्मीर के साथ भी ऐसा ही हुआकि सामने बिठा कर तवज्जो डाली क़ल्ब में हरकत होने लगी हालाँकि इस वक़्त वह तालिब भी नहीं हुए थे।

हाफ़िज़ महमूद साहिब आफ़ाक़ी जो कि लंदन में रहते हैं उन्हें अरसा दारज़ से रूहानियत की तलाश थी जिस की खातिर उन्हों ने हिंदोस्तान व पाकिस्तान की मुतअद्दिदखानक़ाहों के पैरों की बारगाहों में हाजिरी दी कई खानका हूँ से खिलाफत भी मिली मगर मकसूद हासिल न हो अ मुर्शद कामिल की तलाश थी बिलआख़िर हिंदोस्तान में हज़रत इमाम रब्बानी मुजद्दिद अल्फ़ सानी क़ुद्दिस सिर्रहू की बारगाह में सरहिंद शरीफ़ हाजिर हुए और दुआ माँगी कि को ई शैख़ कामिल मिल जाए बादा तनवीर भाई जो कि हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान के ख़लीफ़ा हैं से सरहिंद शरीफ़ में मुलाक़ात हुई और उन से अपना मुद्दा बयान किया अन्हु M ने हाफ़िज़ साहिब की तलब रूहानियत को देख करकहा कि हमारे शैख़

हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान ऐसे कमालात के हामिल हैं जिन की बारगाह से कसीर लोग कसब फ़ैज़ कररहे हैं और मार्फत वरूहानियत और सुलूक की मंजिलें तै कर रहे हैं आप वहाँ जाएँ उन शा अल्लाह उन की बारगाह में आप की रूहानी प्यास बुझ जाए गी।उसके बाद तनवीर भाई के साथ वह क़न्नौज आये और शरफ़ मुलाक़ात हासिल कर अपना मकसूद अर्ज़ किया हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान ने कर्म फ़रमाया और तरीका ज़िक्र तलक़ीन फ़रमाया बादा इशा के मुराक़बे में उन पर ख़ास तो जह डाली और बाद मुराक़बा हाल दरयाफ्त फ़रमायारज़ किया हुज़ूर क़ल्ब में भारी पन महसूस किया। फ़रमाया कि यह क़ल्ब जाकिर होने की अलामत हैऔर यह भी बहुत बड़ी कामयाबी है आप में नेकी है उन शा अल्लाह थोड़े दिनों में क़ल्ब जाकिर हो जाए गा हाफ़िज़ साहिब ने अर्ज़ किया जिस मुर्शद की तलाश थी आज वह मुझे मिल गया है लहज़ा ख़ाकसार कोहज़ूर मुरीद फ़रमालें आप ने मना फ़रमाया ज़्यादा इसरार पर आप ने दाखिल सिलसिला फ़रमालिया ।लिंद न जाने के बाद हाफ़िज़ साहिब ने फोन किया कि क़ल्ब में हरकत होने लगी हैऔर हालत यह हैकि जब आप का तसोर करता हूँ तो आप सामने नज़र आते हैं। सुबहान अल्लाह आज अलहम्द लिल्लाह बह्रुल-इरफ़ान के कर्म से हाफ़िज़ साहिब के जुमला लताइफ़ जाकिर हैं और सात समंदर पार यूरोप की सरजमीं लंदन में रह कर सुलूक की मंजिलें तयकर रहे हैं और आफ़ाक़ी फ़ैज़ान से मालामाल हो रहे हैं ।हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान क़ुद्दिस सिर्रहू ने फ़रमाया कि माशा अल्लाह हमारेबुजुर्गों का फ़ैज़ान यूरोप की सरजमीं लंदन में भी पहुँच गया। अलहम्द लिल्लाह

जब उन के गुदा भर देते हैं शाहान ज़माना की झोली

मुहताज का जब यह आलम है मुख्तार का आलम किया होगा

अब में उन खुश नसीब ज़ाकिरेन हज़रात के अस्मा ग्रामी ज़िक्र कर रहा हूँ जो आप की ज़ात वाला सिफ़ात सेमुस्तफ़ीज़ हुए औरअपने क़ल्ब वक़ालिब को जाकिर करके लज़्ज़त ज़िक्र व इबादत से आशना हुए और मुर्शद आली वक़ार क़ुद्दिस सरह के दुनिया से रुपोश होने के बाद भी फ़ैज़ान दिन ब दिन बढ़ता जा रहा है , और मजार अक़्दस पर बैठने से महसूस होरहा है कि फ़ैज़ का दरिया ब रहा है , और जिन जिन मुक़ामात पर हुज़ूर क़िबला ने हलक़ा ज़िक्र क़ायम किया है वहाँ पर बैठने से , और आप की तसनीफ़ करदा कुतुब का मुताला करने सेभी अहले ज़िक्र फ़ैज़ महसू स कर रहे हैं ।और जो लोग अभी तक क़न्नौज हाजिर नहीं हुए हैं वह भी सिर्फ़ तसोर शैख़ करके ही इस लज़ त को महसूस कर रहे हैं ।

वाज़िह रहेकि उन हज़रात का ज़िक्र महज़ इस मक़सद से किया जारहा है कि इस पर फ़ित्न और किज़्ब बयानी के दौर में

आम तौर पर मुरीदैन अपने मशाइख़ के ताल्लुक से मुबालग़ा आराई की वजह से लोगों का ऐतबार उठ गया है।लहआहल ज़िक्र विषग़ल के नाम और पते के साथ बात को पुख्ता करने की कोशिश की है नीज़ इस से अहले तलब को रगबत भी पैदा होगी।

आप के रूहानी तसर्फ़ात व कमालात के बहुत से वाक़ियात हैं उन शा अल्लाह आइंदा बयान करूँगा इस वक़्त आप के ग़म फुरकत और इस नंबर की तबाअत की जल्दी की वजह से इसी पर इकतिफ़ा कर रहा हूँ बातें तो बहुत हैं किया किया बयान करूँ उन की शान ही निराली है।

बैरून मुमालिक अहले ज़िक्र के असमाए ग्रामी:

हाफ़िज़ महमूद आफ़ाक़ी। लंदन, नसीर उद्दीन ख़ान, अब्द अल्लाह, तलहा, मुहतरमा साइमा। पाकिस्तान, मुहम्मद रज़ा आफ़ाक़ी। सय्यद पुर, बंगला देश, मुहम्मद जाकिर ख़ान। दुबई, मौलाना अब्द अलरहीम हौद। चेन, मौलाना नजीर आफ़ाक़ी। नेपाल

अहले ज़िक्र उल्मा की फिहरिस्त :

अहले ज़िक्र उलमा के असमाएग्रामीशहर व सूबा

हज़रत मौलाना अहमद सईद मुजद्दिदी साहिब जानशीन बह्र उल-इरफ़ानक़न्नौज शरीफ़

हज़रत मौलाना बरकात अहमद मुजद्दिदी साहिब नायब जानशीन बह्र उल-इरफ़ानक़न्नौज शरीफ़

हज़रत मौलाना सय्यद नूर आलम मिस्बाही बरकाती साहिबबलरामपुर , यू।पी

हज़रत मौलाना आसिफ रज़ा साहिब आफ़ाक़ी साहिबकस्बा जरारी फ़र्ख़ आबाद

हज़रत मौलाना आफताब आलम आफ़ाक़ी मुजद्दिदी साहिबबसंत पुर , ज़िला देवरिया

हज़रत मौलाना मुहम्मद ज़िया अलक़मर आफ़ाक़ी मुजद्दिदीपिपलवती ख़ुर्द हसन पुर अमरोह

हज़रत मौलाना अब्द उलअज़ीज़ आफ़ाक़ी मुजद्दिदी साहिबक़न्नौज शरीफ़

हज़रत मौलाना मुशाहिद रज़ा मुजद्दिदी साहिब

हज़रत मौलाना जीन इलाबदीन ,बरकाती, आफ़ाक़ीपिपलिया, बदायूं शरीफ़

गंज डंड्वारा

हज़रत मौलाना इमरान अहमद आफ़ाक़ी मुजद्दिदी साहिबसिकंदर पुर , संभल

हज़रत मौलाना राशिदाफ़ाक़ी साहिब ,सक़ाफ़ीभड़ोंसा , फ़र्ख़ आबाद

हज़रत मौलाना कलाम उद्दीन साहिब निज़ामीकशी नगर ,

हज़रत मौलाना अयूब साहिब अज़हरी कादरीदरोग़ा डीह ,कशी नगर

हज़रत मौलाना क़याम उद्दीन आफ़ाक़ी साहिबकशी नगर ,

हज़रत मौलाना नूर उद्दीन आफ़ाक़ी साहिबकशी नगर ,

हज़रत मौलाना आलम गीर आफ़ाक़ी साहिबकशी नगर ,

हज़रत मौलाना आफ़ाक़ साहिब आफ़ाक़ीकशी नगर ,

हज़रत मौलाना रियाज़ उद्दीन निज़ामी आफ़ाक़ीखिरकिया कशी नगर ,

जनाब मौलवी सलाह उद्दीन आफ़ाक़ी साहिबखर किया कशी नगर

हज़रत मौलाना कासिम साहिब आफ़ाक़ीबड़हरिया सेवान बिहार ,

हज़रत मौलाना अहमद अली आफ़ाक़ी मुजद्दिदी साहिबबड़हरिया सेवान बिहार

हज़रत मौलाना तबरेज़ आफ़ाक़ी साहिबसेवान ,बिहार

हज़रत मौलाना शाहिद आफ़ाक़ी मुजद्दिदी साहिबचोरी चौरा ,गोरखपुर

हज़रत मौलाना अब्द अलमाजद आफा क़ि मुजद्दिदी साहिबहरियाणा ,अमरोह

हज़रत मौलाना तारिक आफ़ाक़ी मुजद्दिदी साहिबहरियाणा ,अमरोह

हज़रत मौलाना राशिद आफ़ाक़ी मुजद्दिदी साहिबभदौरा ,अमरोह

हज़रत मौलाना नूर उएन आफ़ाक़ी मुजद्दिदी साहिबक़न्नौज ,शरीफ़

हज़रत मौलाना अबू दजाना आफ़ाक़ी मुजद्दिदी साहिबक़न्नौज ,शरीफ़

मौलवी मुहम्मद बुलाल आफ़ाक़ीछिबरा मउ

हज़रत मौलाना उन्नीस रिज़वी साहिबकंदरकी ,मुराद आबाद

हज़रत मौलाना ग़यूर आफ़ाक़ी मुजद्दिदी साहिबकंदरकी ,मुरादाबाद

हज़रत मौलाना गुलबीज़ आफ़ाक़ी मुजद्दिदी साहिबकंदरकी ,मुराद आबाद

हज़रत मौलाना शाह नवाज़ आफ़ाक़ी मुजद्दिदी साहिबईसा पुर ,मर्द आबाद

हज़रत मौलाना ज़हीर उलइस्लाम साहिबसंभल ,

हज़रत मौलाना सय्यद औसाफ़ आफ़ाक़ी साहिबजमाल पुर ,अली गढ़

हज़रत मौलाना अकर्म आफ़ाक़ी साहिबनिकटय, बरेली शरीफ़

जनाब मौलवी शफ़ीक़ साहिब आफ़ाक़ीबनारस,

(मौलाना) नाज़िम आफ़ाक़ी मुजद्दिदी साहिबसीसूंह ,संभल

हज़रत मौलाना गुलाम रब्बानी आफ़ाक़ी साहिबदाई पुर ,क़न्नौज

मौलाना शमाइल आफ़ाक़ीमंसूर पुर, मुराद आबाद

हज़रत मौलाना शाहिद आफ़ाक़ी मुजद्दिदी साहिबकस्बा जरारी ।फ़र्ख़ आबाद

हज़रत मौलाना शकील आफ़ाक़ी साहिबजरारी फ़र्ख़ आबाद

हज़रत मौलाना अवैस आफ़ाक़ी मुजद्दिदी साहिबक़न्नौज शरीफ़

हज़रत मौलाना शफ़ीक़ हमदानी शेरी आफ़ाक़ी साहिबराजौरी जम्मू वक्षमीर

हज़रत मौलाना अब्द अलरशीद आफ़ाक़ी साहिबपूँछ ,जम्मू व कश्मीर

हज़रत मौलाना सईद नक़्शबंदी आफ़ाक़ी साहिबदरहाल ,जम्मू व कश्मीर

हज़रत मौलाना उबीद अल्लाह हैदरी नक़्शबंदी साहिबनागौर शरीफ़ ,राजस्थान

जनाब मौलवी अहमद बुखारी आफ़ाक़ी साहिबनागौर शरीफ़ ,राजस्थान

हज़रत मौलाना मंजूर नक़्शबंदी आफ़ाक़ी साहिबबाड़मेर ,राजस्थान

हज़रत सय्यद सुहेल चिश्ती साहिबसेकर ,राजस्थान

हज़रत मौलाना सलमान शाहिद आफ़ाक़ी साहिबमुबारकपुर ,आज़म गढ़

हज़रत मौलाना मुदस्सर उसमान आफ़ाक़ी साहिबमुबारकपुर , आज़म गढ़

हज़रत मौलाना असाम उद्दीन साहिबमुबारकपुर , आज़म गढ़

हज़रत मौलाना जहांगीर आफ़ाक़ी साहिबमहबूब नगर , तलंगाना

हज़रत मौलाना मुहम्मद आसिफ रज़ा आफ़ाक़ी साहिबमहबूब नगर , तलंगाना

जनाब मौलवी आबिद हसीन साहिबबनारस , यूपी

जनाब मौलवी इरशाद आफ़ाक़ी साहिबभदोही , यूपी

जनाब मौलवी सय्यद अमजद अली साहिबडिंडौरी, एम । पी

जनाब मौलाना नूर आलम मुजद्दिदी साहिबरसूल आबाद ,कानपुर देहात

जनाब मौलाना इरफान आफ़ाक़ी साहिबमुहम्मद आबाद, ओरिया,यू।पी

जनाब मौलाना आलमगीर साहिब अशरफीअररिया , बिहार

जनाब मौलाना मुहम्मद मसाऊद आफ़ाक़ी साहिबअररिया, बिहार

जनाब मौलाना यूनुस अत्तारी साहिब आफ़ाक़ीराजौरी , जम्मू व कश्मीर

जनाब मौलाना गुलाम अली आफ़ाक़ी साहिबजालोर, राजस्थान

जनाब मौलाना मुहम्मद सलमान आफ़ाक़ी साहिबदेवहा , कानपुर नगर

जनाब मौलवी मुहम्मद अख्तर रज़ा निज़ामी साहिबकशी नगर , यूपी

जनाब मौलवी मुहम्मद गुलाम जैलानी निज़ामी साहिबकशी नगर , यूपी

जनाब मौलवी मुहम्मद सलेम आफ़ाक़ी साहिबखिरकिया , कशी नगर

जनाब मौलवी मुहम्मद कलाम उद्दीन आफा क़ि साहिबकशी नगर , यूपी

जनाब मौलवी अब्द अलसुबहान आफ़ाक़ी साहिबहमाली पूरा क़न्नौज

जनाब मौलाना मुहम्मद अशफाक आफ़ाक़ी साहिबप्रसौनी , कशी नगर

जनाब मौलाना मुहम्मद सिराज आफ़ाक़ी साहिबमल्लावां ,हरदोई

जनाब मौलाना अब्द उलहफ़ीज़ आफ़ाक़ी साहिबदमोह , एम पी

मौलवी मुहम्मद आदिल आफ़ाक़ीअकबर पुर, क़न्नौज

जनाब मौलाना मुहम्मद सरताज आफ़ाक़ी साहिबखीरी , लखीम पुर

मौलवी मुहम्मद सलमान आफ़ाक़ीसुलतान पुर, यू पी

मौलाना मुहम्मद रिज़वान आफ़ाक़ीकस्बा रुद्रपुर, ऊधम संघ नगर

अहले ज़िक्र हुफ़्फ़ाज़ व क़रा के असमाए ग्रामीशहर, वसूबा

जनाब हाफ़िज़ मुहम्मद इसहाक़ आफ़ाक़ी साहिबसिकंदरपुर , संभल

जनाब हाफ़िज़ वक़ारी मुहम्मद अमीन रिज़वी साहिबबीकानेर , राजस्था न

जनाब हाफ़िज़ फ़ैज़ उलइस्लाम साहिब लतीफ़ीसंभल , यूपी

जनाब हाफ़िज़ व क़ारी क़मर आलम अशरफी साहिबबगरूवा, मुराद आबाद

जनाब हाफ़िज़ व क़ारी मुहम्मद आज़म साहिब शेरीराजौरी, जम्मू ङो कश्मीर

जनाब हाफ़िज़ मुहम्मद जावेद उर्फ परवाना साहिबदरहाल , राजौरी ,जम्मू

जनाब हाफ़िज़ मुहम्मद जावेद आफ़ाक़ी साहिबकैरी , राजौरी, जम्मू

जनाब हाफ़िज़ मुहम्मद आसिफ आफ़ाक़ी साहिबभड़ोंसा , फ़र्ख़ आबाद

जनाब हाफ़िज़ शाह आज़म आफ़ाक़ी साहिबसेवान , बिहार

जनाब हाफ़िज़ मुहम्मद फहीम आफ़ाक़ी साहिबसीसूंह , संभल

जनाब हाफ़िज़ मुहम्मद समीर साहिबसीसूंह , संभल

जनाब हाफ़िज़ मुहम्मद इफ्तिख़ार आफ़ाक़ी साहिबढक्का ,हरियाणा,अमरोह

जनाब हाफ़िज़ मुहम्मद तल्ख़ीस साहिब आफ़ाक़ीढक्का , हरियाणा , अमरोह

जनाब हाफ़िज़ व क़ारी महताब आलम आफ़ाक़ी साहिबमोतिहारी , बिहार

जनाब हाफ़िज़ मुहम्मद बाब उद्दीन साहिबकशी नगर , यूपी

जनाब हाफ़िज़ गुलाम अहमद रज़ा आफ़ाक़ी साहिबकशी नगर , यूपी

जनाब क़ारी अरशद नूरी साहिबसेवान ,बिहार

जनाब हाफ़िज़ मुहम्मद फ़ारूक़ आफ़ाक़ी साहिबअमरोह यूपी

जनाब हाफ़िज़ इस्लाम उद्दीन आफ़ाक़ी साहिबशुक्ला गंज ,कानपुर

जनाब क़ारी मुहम्मद नीर आफ़ाक़ी साहिबबालापीयर , क़न्नौज

जनाब हाफ़िज़ मुहम्मद इमरान साहिब आफ़ाक़ीईसा पुर, मुराद आबाद

जनाब हाफ़िज़ मुहम्मद रेहान आफ़ाक़ी साहिबईसा पुर , मुराद आबाद

जनाब हाफ़िज़ मुहम्मद अल्ताफ़ आफ़ाक़ी साहिबखिरकिया,कशी नगर

जनाब हाफ़िज़ मुहम्मद रमजान आफ़ाक़ी (झारखंडी)विशाखा पट्टनम, ए।पी

जनाब हाफ़िज़ जलाल उद्दीन आफ़ाक़ी साहिबपंद्रती, विशाखा पट्टनम

जनाब क़ारी नयाज़ातारी साहिब आफ़ाक़ीसिकंदर पुर , ज़िला क़न्नौज

जनाब क़ारी मुहम्मद अबसार आफ़ाक़ी साहिबसिकंदर पुर , ज़िला क़न्नौज

जनाब क़ारी मुहम्मद महफूज़ , साहिब आफ़ाक़ीजहतोली, अमरोह

जनाब क़ारी दीन मुहम्मद (इमामी) साहिब आफ़ाक़ीजहतोली , अमरोह

जनाब हाफ़िज़ अब्द अलख़ालिक़ मुजद्दिदी आफ़ाक़ी साहिबभड़ोंसा , फ़र्ख़ आबाद

जनाब क़ारी मुहम्मद नायाब आफ़ाक़ी साहिबमल्लावां , हरदोई

जनाब हाफ़िज़ अता अलमुस्तफ़ा साहिबबदायूं , यूपी

जनाब हाफ़िज़ मुहम्मद इलियास आफ़ाक़ी साहिबबदायूं , यूपी

जनाब क़ारी मुहम्मद सलमान आफ़ाक़ी साहिबसरसई नावर, अट्टावह

हज़रत मौलाना बुलाल आफ़ाक़ीअसा पुर , मुरादाबाद

मौलाना आरिफ आफ़ाक़ीअट्टावह

बाज़ अहले ज़िक्र हज़रात कयास्माए ग्रामीशहरो सूबा

जनाब हाजी मुईन अहमद आफ़ाक़ी साहिबअहमद नगर क़न्नौज

जनाब सोफी तनवीराहमद जमाती साहिब आफ़ाक़ीइला आबाद , यूपी

जनाब हाजी मुहम्मद शमशाद अत्तारी साहिब आफ़ाक़ीसफदर गंज , क़न्नौज

जनाब मास्टर मुहम्मद कौसर आफ़ाक़ी साहिबसरियाँ इख्तियार , गोपाल गंज

जनाब मुहम्मद नासिर ख़ाँ आफ़ाक़ी साहिबचमड़ा मंडी ,सेवान , बिहार

जनाब मुहम्मद सरफ़राज़ ख़ाँ आफ़ाक़ी साहिबकाग़ज़ी मुहल्ला सेवान, बिहार

जनाब डाक्टर मुहम्मद अख्तर आफ़ाक़ी साहिब रजिस्ट्रार राजौरी मेडिकल कालिजराजौरी जम्मू व कश्मीर

जनाब मास्टर मुहम्मद शकील आफ़ाक़ी साहिबराजौरी , जम्मू व कश्मीर

जनाब मुहम्मद जुनेद फ़ारूक़ (लुक्की)आफ़ाक़ी साहिबनाला रोड , कानपुर शहर

जनाब मुहम्मद असलम रंगरेजाफ़ाक़ी साहिबभीलवाड़ा ,राजस्थान

जनाब मुहम्मद मुईन आफ़ाक़ी साहिबउदय पुर ,राजस्थान

जनाब हाजी मुहम्मद उन्नीस लतीफ़ी साहिब आफ़ाक़ीडीनगर पुर , मुराद आबाद

जनाब मुहम्मद आमिर आफ़ाक़ी (हबीबी ट्रांसपोर्ट वाले)डीनगर पुर मुराद आबाद

जनाब मुहम्मद अबरार आफ़ाक़ी साहिबसराय औरंगाबाद बनारस

जनाब मुहम्मद इसहाक़ साहिब नूरीशहर बरेली शरीफ़

जनाब डाक्टर मुहम्मद एहसान आफ़ाक़ी साहिबगद्दी पुर , मुराद आबाद

हाजी मुहम्मद अवैस साहिब आफ़ाक़ीजीतवाड़ा , मुराद आबाद

जनाब मुहम्मद सुहेल आफ़ाक़ी साहिबडोम घर , मुराद आबाद

जनाब मुहम्मद शाह ज़ेब आफ़ाक़ी साहिबमुबारकपुर, आज़म गढ़

जनाब आफताब आलम साहिब आफ़ाक़ीपिपलवती खुर्द , अमरोह

जनाब मास्टर मुहम्मद यूनुस निज़ामी साहिब आफ़ाक़ीमख़दूमा पुर , क़न्नौज

सय्यद सिकंदर आफ़ाक़ीबीकानेर, राजस्थान

मास्टर दिलशादईसा पुर, मुराद आबाद

महफूज़ आलमईसा पुर, मुराद आबाद

मुहम्मद रेहान आफ़ाक़ीगद्दी पूरा, मुराद आबाद

मुहम्मद उसमानगद्दी पूरा, मुराद आबाद

अशरफ भाईअसाद पुर, मुराद आबाद

क़ाज़ी मुहम्मद इकबाल आफ़ाक़ीभीलवाड़ा, राजस्थान

जमील आफ़ाक़ीसरहिंद शरीफ़, पंजाब

मुहम्मद रियाज़ आफ़ाक़ीशहर क़न्नौज

मुहम्मद सग़ीरआफ़ाक़ीशहर क़न्नौज

मुहम्मद बुलाल आफ़ाक़ी (टाल वाले)शहर क़न्नौज

मुहम्मद वसीम आफ़ाक़ीशहर क़न्नौज

मुहम्मदनवर उएन आफ़ाक़ी वल्द मुहम्मद सग़ीरशहर क़न्नौज

अनवर आफ़ाक़ीशहर क़न्नौज

मज़कूरा बाला फिहरिस्त में उन्हें हज़रात के असमाए ग्रामी तहरीर किए गए हैं जिन में ज़िक्र अच्छी तरह सरायत कर चुका है और बहुत से वह हैं जो मुक़ामात क़ुर्ब की बड़ी बड़ी मंजिलों पर फ़ाइज़ हो चुके हैं।

बह्र उल-इरफ़ान क़ुद्दिस सिर्रहू के चंदमशावरख़ल्फा व तलामज़ा

रब तआला ने हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान अलैहि अर्रहमा को शरीअत वतरीक़त दोनों में ही महारत ताम्ह अता फ़रमाई थी इस लिए तालिबेन वसालकेन ने ज़ाहिरी वबातिनी दोनों चश्मों से सैराबी हासिल की आपके ज़रिया उलूम बातिनी और सुलूक की दौलत हासिल करने वालों की एक झलक गुज़श्ता सफ़हात में दिखाई जाचुकी है। जिन में से कुछ खुश नसीबों को हुज़ूर वाला ने कमाल एहतियात के साथ मादूदे चंद को खिलाफत और बाज़ को इजाजत से सरफ़राज़ फ़रमाया जिन का ज़िक्र यहाँ किया जारहा है।

नीज़ आप ने चार दहाईयों तक इल्म ज़ाहिर के दरिया बहाए जिन से हजारों उल्मा व तलबा ने अपने फ़िक्र विशऊर को जिला बख्शी उन सब का यहाँ ज़िक्र करना मुमकिन नहीं है लहज़ा सिर्फ़ चंद मशहूर तरिन तलामज़ा का ज़िक्र किया जा रहा है ।

वाज़िह रहे हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान ने अपने ख़ुलफ़ा की तीन किस्में फ़रमाई थीं।

(1 ) वह ख़ुलफ़ा जिन्हों ने बाज़ाबता सोहबत उठा कर मनाज़िल सुलूक तै कीं और आप ने उन्हें खिलाफत मुतल्लक़ा अता फ़रमाई।

( 2) वह उल्मा जिन्हों ने बाज़ाबता सुलूक तै नहीं किया लेकिन उनकी नेकी और दीनी ख़िदमात के पेश नज़र हुज़ूर क़िबला ने उन्हें खिलाफत मुक़य्यदा मरहमत फ़रमाई।

( 3) वह अहले ज़िक्र जो बाज़ाबता आलम नहीं हैं लेकिन ज़िक्र वफ़कर में मुवाज़बत व हमेशज्ञ बरतते थे और आसार अच्छे थे उन्हें आप ने इजाजत से नवाजा।

यह भी वाज़िह कि हुज़ूर बह्र उल-इरफ़ान की तहरीरात वित्ताकयदात के मुताबिक आप की खिलाफत वाजाजत अक़ाइद वामाल की इसलाह और मुहब्बत व वफादारी मशाइख़ के साथ मशरूत है लहज़ा अगर कोई ख़लीफ़ा विमिजाज़ फसाद अक़ाइदगैर शरई फेअल पर मदावमत या गुस्ताखी मशाइख़ का मुर्तक़िब होता है तो आप की तहरीर की रो से उसकी खिलाफत वाजाजत मंसूख़ हो जाएगी।

बह्र उल-इरफ़ान अलैहि अलरहम वालरिज़्वान केचंद मशाहीर ख़ुलफ़ा

1- हज़रत मौलाना अहमद सईद साहिब जानशीन बह्रुल-इरफ़ान क़न्नौज

2- हज़रत मौलाना बरकात अहमद साहिब नायब जानशीन बह्रुल-इरफ़ान क़न्नौज

3 । मौलाना साबर अली रहमानी आफ़ाक़ी रहमताल्लाह अलैहि लला पूरा बनारस

4।हज़रत अल्लामा मौलाना आसिफ रज़ा मुजद्दिदी आफ़ाक़ी कस्बा जरारी ज़िला फ़र्ख़ आबाद यूपी (हाल मुकीम क़न्नौज)

5। हज़रत मौलाना सय्यद नूर आलम मुजद्दिदी आफ़ाक़ी, निर्चहुआँ सेफ ज़िला बलराम पुर

6।हज़रत मौलानाक़ारी ज़ियाआलक़मराफ़ाक़ी मुजद्दिदी मौज़ा पिपलवती ख़ुर्दज़िला अमरोह(हाल मुकीम क़न्नौज)

7-हज़रत मौलाना आफताब आलम आफ़ाक़ी, मौज़ा बसंत पुर ज़िला देवरिया

8-हाफ़िज़ मुहम्मद इसहाक़ आफ़ाक़ी सिकंदर पुर ज़िला संभल (हाल मुकीम राज नगर राजस्थान)

9- मौलाना कासिम साहिब आफ़ाक़ी बढ़रिया सेवान बिहार

10।मौलाना अबैदुल्लाह हैदरी नक़्शबंदी, नागौरशरीफ राजस्थान

11।मौलाना हाफ़िज़ मुहम्मद सईद आफ़ाक़ी नक़्शबंदी, वादी दरहाल ज़िला राजौरी जम्मू कश्मीर

12।मौलाना मुशाहिद आफ़ाक़ी पीपल्या बदायूं

13। मौलाना कलाम उद्दीन आफ़ाक़ी, कशी नगर

14। मौलाना जीन इलाबदीन बरकाती आफ़ाक़ी, गंज डंड्वारा

15।मौलाना अयूब आफ़ाक़ी, तुमकोही कशी नगर

16।मौलाना नूर उद्दीन आ बाक़ी बहुराछपुरा कशी नगर

17।मौलाना सलमान शाहिदा फ़ाक़ी मुबारक पूरेआज़म गढ़

18।क़ारी मुहम्मद आज़म आफ़ाक़ी, मौज़ा गर्दन राजौरी जम्मू कश्मीर

19।मौलाना शफ़ीक़ हमदानी आफ़ाक़ी राजौरी जम्मू कश्मीर

20।मौलानाइरफान आ फ़ाक़ी मुहम्मदाबाद ज़िला ओरिया

21।हाफ़िज़ फ़ैज़ उलइस्लाम आफ़ाक़ी संभल

22।क़ारी अमीन साहिब आफ़ाक़ी बीकानेर राजस्थान

23।मौलवी शफ़ीक़ आफ़ाक़ी लला पूरा बनारस

24।सोफी तनवीर आफ़ाक़ी इला ٰباد

25।मौलाना यूनुस अत्तारी आफ़ाक़ी राजौरी जम्मू कश्मीर

बह्र उल-इरफ़ान क़ुद्दिस सिर्रहू केबैरोन मुल्क ख़ुलफ़ा

26।डाक्टर हज़रत मौलाना सय्यद इरशाद बुखारी देनाज पुर बंगला देश

27।हज़रत मौलाना शैख़ अविकल हसनी लेबनान हाल मुकीम अमेरीका

28।हज़रत मौलानाशीख़ अहमद यूसुफ साहिब अमेरीका

29।हज़रत मौलाना अब्द अलरहीम साहिब चेन

30।हज़रत मौलाना शैख़ इसहाक़ साहिब चेन हाल मुकीम कलकत्ता

बह्र उल-इरफ़ान के चंदमशाहीर तलामज़ा

1-हज़रत मौलानाडाक्टरसीदालीम अशरफ जाइसी, राय बरेली यूपी

प्रोफेसर मौलाना आजादनेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी हैदराबाद

2-हज़रत मौलाना सय्यद क़सीम अशरफ जाइसी उर्फ हसन मियां राय बरेली यूपी

3-मौलाना अब्द अलख़ालिक़ जामई कछौछह सदर उलमदर्स जामा अशरफ कछौछह शरीफ़

4-मौलाना सय्यद जलाल उद्दीन अशरफ (कादरी मियां) बानी विमुहतमिम मख़दूम अशरफ मिशन पंडोह शरीफ़

5-मौलाना राशिद मियां मक्की कछौछह शरीफ़

6 ।डाक्टर सय्यद इरशाद बुखारी देनाज पुर बंगला देश सदर इस्लामिक रिसर्च सेंटर बंगला देश

7- हज़रत मौलाना मुफ्ती शोएब अहमद नईमी साहिब अलैहि अर्रहमा दामाद ताज अलशरीआ बरेली शरीफ़

8-मौलाना मुफ्ती अफ़ज़ाल साहिब जोखन पुर बहड़ी मुफ्ती मरकज़ दारालाफ़ता बरेली शरीफ़

9- हज़रत मौलाना सय्यद निजाम अशरफ कछौछह मुक़द्दसा

10- मौलाना नूर उलइस्लाम उस्ताज़ दार उलउलूम वार्सिया लखनऊ

11- मौलाना मुफ्ती मुईन उद्दीन बरकाती साहिब उस्ताद जामिआ रिज़वीह मंज़र इस्लाम बरेली शरीफ़

12- मौलाना मुफ्ती रईस अलख़ैरी शहजादा शैख़ अलालम मुहतमिम जामिआ मुहम्मदिया जौनपुर

13- मौलाना मुफ्ती अवैस खेरी साहिब शहजादा शैख़ अलालम खानगाह खैरिय कमाल पुर शरीफ़ ज़िला मिर्ज़ा पुर (बनारस)

14 - हज़रत मौलाना ग़यास उद्दीन साहिब महराज गंज

15- मौलाना खुर्शीद उलइस्लाम साहिब कछौछह मुक़द्दसा

अल्लाह तआला हुज़ूर बह्र उलारफा न अलैहि अलरहम वालरिज़्वान के सदक़े अपने क़ुर्ब वारफान की दौलत ला ज़वाल से औरमशाइख़ मुजद्दिदय की निसबतों और कमालात से हज़ वाफ़र अता फ़रमाए और अपने प्यारे महबूब ﷺ की संतों पर अमल करने और मोतक़िदात अहले सुन्नत व जमात पर क़ायम रहने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए आमीन।